सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बीच, जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड ने पांच साल बाद अपने लॉन्ग-टर्म गोल्ड प्राइस टारगेट को बढ़ा दिया है। उन्होंने अनुमान लगाया है कि अमेरिका में सोने की कीमतें निकट भविष्य में 6,600 डॉलर प्रति औंस से भी अधिक पहुंच सकती हैं। अमेरिका में कीमतों की इस तेजी का असर भारत में भी देखने को मिलेगा और यहां सोना रिकॉर्ड ऊँचाइयों तक जा सकता है। वर्तमान में भारतीय बाजार में सोने की कीमतें लगभग ₹1,11,300 प्रति 10 ग्राम पर हैं, और यदि अमेरिकी सोना 6,600 डॉलर तक पहुंचता है, तो भारत में यह कीमत ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम को भी पार कर सकती है।
ग्रीड एंड फियर रिपोर्ट और विश्लेषण
क्रिस वुड ने अपनी ग्रीड एंड फियर रिपोर्ट में कहा कि ऐतिहासिक मानकों और अमेरिका में बढ़ती प्रति व्यक्ति आय को देखते हुए, सोना लंबे समय में 6,600 डॉलर तक पहुंच सकता है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब इस हफ्ते अमेरिकी बाजार में सोना 3,700 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। फिलहाल सोने की कीमतें लगभग 3,600 डॉलर प्रति औंस के आस-पास बनी हुई हैं। उनका मानना है कि डिस्पोजेबल इनकम और मौद्रिक नीतियों के चलते सोने में दीर्घकालिक तेजी बरकरार रहेगी।

2002 से अब तक का गोल्ड टारगेट का सफर
क्रिस वुड ने 2002 में सोने का लक्ष्य 3,400 डॉलर प्रति औंस तय किया था, जो लगभग 23 साल बाद पार हुआ। उनका अनुमान था कि यह लक्ष्य पहले ही हासिल हो जाना चाहिए था, लेकिन जी-7 देशों की असामान्य मौद्रिक नीतियों की वजह से इसमें देरी हुई। उनका पहला अनुमान 1980 में सोने के उच्चतम स्तर 850 डॉलर प्रति औंस पर आधारित था, जिसे 1980 से अब तक अमेरिका की 6.3% वार्षिक प्रति व्यक्ति आय वृद्धि से जोड़कर निकाला गया था। धीरे-धीरे उनका लक्ष्य बढ़ता गया—मार्च 2016 में 4,200 डॉलर, अगस्त 2020 में 5,500 डॉलर, और अब सितंबर 2025 में यह 6,600 डॉलर पर पहुंच गया है।
गोल्ड का पोर्टफोलियो वेटेज और नई उम्मीदें
वुड का मानना है कि अगर सोना एक बार फिर अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय का 9.9% हिस्सा दर्शाता है, जैसा कि 1980 के बुल मार्केट के समय हुआ था, तो इसकी कीमत लगभग 6,571 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। इसका अर्थ है कि मौजूदा बुल मार्केट का नया लक्ष्य 6,600 डॉलर है। दिलचस्प बात यह है कि 2002 की तीसरी तिमाही से उनकी ग्लोबल पेंशन फंड पोर्टफोलियो में सोने का वेटेज 40% रखा गया है। हालांकि, दिसंबर 2020 में इसे 50% से घटाकर 40% कर दिया गया, क्योंकि उस समय पोर्टफोलियो ने पहली बार बिटकॉइन में निवेश शुरू किया था। ऐसे में, मौजूदा रुझानों के बीच सोना निवेशकों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित विकल्प बना हुआ है।







