नई जीएसटी दरें 2025: दूध, दही, पनीर और सूखे मेवे अब होंगे सस्ते, त्योहारों से पहले बड़ी राहत

By: देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

On: Saturday, September 20, 2025 2:35 PM

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New GST Rates 2025: त्योहारी सीज़न से पहले केंद्र सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है। 22 सितंबर, 2025 से पूरे देश में नई जीएसटी दरें लागू हो जाएँगी। इस बदलाव का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा, क्योंकि कई ज़रूरी चीज़ों पर जीएसटी कम कर दिया गया है। दूध, दही, पनीर और घी जैसी खाने-पीने की चीज़ें अब सस्ती होंगी। इसके अलावा, काजू, बादाम और पिस्ता जैसे सूखे मेवे भी कम दामों पर उपलब्ध होंगे। आइए विस्तार से जानें कि किन चीज़ों पर टैक्स कम हुआ है और किन चीज़ों को सबसे ज़्यादा फ़ायदा होगा।

नई जीएसटी दरों की घोषणा

3 सितंबर, 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी दरों में कमी और स्लैब सुधारों की घोषणा की। सरकार का लक्ष्य महंगाई से निजात पाना और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ाना है। पहले कई चीज़ें अलग-अलग स्लैब में वर्गीकृत थीं, लेकिन अब सुधारों के बाद ज़्यादातर चीज़ें 5% और 18% के स्लैब में शामिल हो गई हैं। गौरतलब है कि लगभग 400 चीज़ों पर टैक्स कम किया गया है। इसमें खाने-पीने की चीज़ों से लेकर घरेलू उपकरण और बच्चों की ज़रूरी चीज़ें तक, सब कुछ शामिल है।

दूध, दही और पनीर पर नई दरें

अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) दूध अब पूरी तरह से GST से मुक्त है। इसका मतलब है कि आपको पैकेज्ड दूध खरीदते समय कोई टैक्स नहीं देना होगा। वहीं, मक्खन, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क पर GST घटाकर 5% कर दिया गया है। पहले इन उत्पादों पर अपेक्षाकृत ज़्यादा टैक्स लगता था, लेकिन अब त्योहारों के मौसम में ये उत्पाद आपके बजट में आसानी से शामिल हो सकते हैं।

रोज़मर्रा के खाने-पीने की चीज़ों पर छूट

नई दरों के तहत, कई पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर भी टैक्स कम कर दिया गया है। पैकेज्ड फ़ूड, भुजिया, सॉस, पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, कॉफ़ी, कॉर्नफ्लेक्स और रेडी-टू-ईट स्नैक्स पर अब सिर्फ़ 5% GST लगेगा। पहले इन पर 12% या उससे ज़्यादा टैक्स लगता था। इस कदम से मध्यम वर्गीय परिवारों को सीधा फ़ायदा होगा, क्योंकि ये चीज़ें अब हर घर की ज़रूरत बन गई हैं।

क्या सूखे मेवे सस्ते होंगे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या काजू, बादाम और पिस्ता जैसे सूखे मेवों की कीमतें भी कम होंगी। इसका जवाब है, हाँ। सरकार ने इन मेवों पर लगने वाले टैक्स को 12% से घटाकर सिर्फ़ 5% कर दिया है। यानी अब आपको इन मेवों पर ज़्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा। त्योहारों और व्रत-उपवास के दौरान इनकी खपत बढ़ जाती है, इसलिए उपभोक्ताओं को काफ़ी राहत मिलेगी।

त्योहारों से पहले सरकार का तोहफ़ा

22 सितंबर से नवरात्रि शुरू हो रही है और इस दौरान दूध, दही, घी और सूखे मेवों पर टैक्स में कमी वाकई एक बड़ी राहत है। नवरात्रि के दौरान लोग ज़्यादा फल और सूखे मेवे खाते हैं। अब काजू, बादाम और पिस्ता जैसे मेवे भी पहले से सस्ते होंगे। इस बदलाव से न सिर्फ़ आम उपभोक्ताओं को फ़ायदा होगा, बल्कि व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं को भी बिक्री बढ़ाने का मौका मिलेगा।

अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव

खाद्य पदार्थों के अलावा, पर्सनल केयर उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उपकरण, मोटर वाहन और शिशु उत्पादों पर भी जीएसटी दरें कम कर दी गई हैं। सरकार का दावा है कि इससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और ज़रूरी वस्तुओं की किफ़ायती दामों पर पहुँच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, जीवन और स्वास्थ्य बीमा को भी कर से मुक्त कर दिया गया है, जिससे आम परिवार पर आर्थिक बोझ और कम होगा।

उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब है?

नई जीएसटी दरों के लागू होने का आम उपभोक्ता के बजट पर सीधा असर पड़ेगा। खासकर त्योहारों के मौसम में, जब बाज़ारों में चहल-पहल रहती है, ज़रूरी चीज़ों की कीमतें कम होने से घरों में पैसे की बचत होगी। जहाँ दूध, दही और पनीर जैसी ज़रूरी चीज़ें घरों में रोज़मर्रा की खपत का हिस्सा हैं, वहीं काजू, बादाम और पिस्ता जैसे सूखे मेवे त्योहारों और खास मौकों का अहम हिस्सा होते हैं। इन चीज़ों पर जीएसटी कम होने का मतलब है कि आम आदमी भी इन्हें आसानी से खरीद पाएगा।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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