भारत की प्रमुख फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी कंपनी स्विगी ने राइड-हेलिंग स्टार्टअप रैपिडो में अपनी 12 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है। इस हिस्सेदारी को रैपिडो के मौजूदा निवेशक प्रोसोस और वेस्टब्रिज कैपिटल को बेचा जाएगा। स्विगी ने 23 सितंबर को एक्सचेंज को सूचित किया कि इस हिस्सेदारी की कुल बिक्री राशि ₹2,399 करोड़ होगी। प्रोसोस ने ₹1,968 करोड़ ($223 मिलियन) की हिस्सेदारी खरीदी, जबकि वेस्टब्रिज ने ₹431.496 करोड़ ($49 मिलियन) के शेयर खरीदे।
स्विगी की बिक्री के पीछे कारण
स्विगी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वह रैपिडो में अपनी हिस्सेदारी से बाहर आएगी, क्योंकि अगर रैपिडो फूड डिलीवरी सेक्टर में कदम रखता है तो संभावित हितों का टकराव हो सकता है। इस कदम से स्विगी को अपनी फाइनेंसियल स्ट्रक्चर को मजबूत करने और बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी तरलता बढ़ाने में मदद मिलेगी। जून तिमाही (Q1 FY26) तक, स्विगी के पास ₹5,354 करोड़ नकद और समकक्ष संपत्ति थी, और रैपिडो हिस्सेदारी की बिक्री से इस राशि में और ₹2,399 करोड़ जुड़ेंगे।

निवेश पर लाभ
स्विगी के लिए रैपिडो में निवेश बेहद लाभकारी साबित हुआ। कंपनी ने 2022 में रैपिडो में ₹950 करोड़ का निवेश किया था और केवल तीन साल में इस निवेश पर 2.5 गुना से अधिक रिटर्न अर्जित किया। यह निवेश रणनीति स्विगी के लिए वित्तीय रूप से फायदेमंद रही और अब इसे अपने मुख्य बिजनेस में निवेश और विस्तार के लिए अतिरिक्त फंड मिलेगा।
शेयर मार्केट और भविष्य की योजना
मंगलवार को स्विगी के शेयर बीएसई पर ₹449.15 पर बंद हुए, जो पिछले दिन से ₹0.20 या 0.04% कम थे। इस कदम के बाद स्विगी के पास बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करने और नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध होगा। कंपनी अब इस राशि का इस्तेमाल अपनी कैश पोजिशन मजबूत करने, टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स में सुधार, और फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी कारोबार के विस्तार के लिए करेगी।







