ट्रंप का 100% टैरिफ बम: भारतीय फार्मा सेक्टर और शेयर बाजार पर गहरा असर

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Trump’s 100% Pharma tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने वैश्विक दवा उद्योग को हिलाकर रख दिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर से अमेरिका में आयातित सभी ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। इस घोषणा का भारतीय दवा उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। शेयर बाजार का फार्मा इंडेक्स लाल निशान पर पहुँच गया है और निवेशकों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

Sun Pharma से लेकर Abbott India तक लुढ़का शेयर

इस टैरिफ बम की सबसे ज़्यादा मार सन फार्मा पर पड़ी है। कंपनी के शेयर की कीमत शुक्रवार को 3% से ज़्यादा गिरकर 1,548 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुँच गई।

  • एबॉट इंडिया में लगभग 2% की गिरावट,
  • मैनकाइंड फार्मा में 1.5% की गिरावट,
  • ग्लेनमार्क फार्मा में 1.6% की गिरावट,
  • अरविंद फार्मा में 1% की गिरावट,
  • ल्यूपिन और सिप्ला में 1% से ज़्यादा की गिरावट।
  • निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी लगभग 1.4% गिरकर 21,672 पर आ गया।

100% टैरिफ पर ट्रंप का तर्क

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ट्रुथ सोशल पर लिखा, “अमेरिका अपने नागरिकों को महंगी दवाओं के बोझ से मुक्त करेगा। 1 अक्टूबर से, कोई भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा अमेरिका में तभी प्रवेश करेगी जब वे 100% शुल्क का भुगतान करेंगी।”

हालांकि, उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि जो कंपनियां अमेरिका में कारखाने बना रही हैं या वहां विनिर्माण शुरू करने की योजना बना रही हैं, उन्हें इन टैरिफ से छूट दी जाएगी।

भारत पर इसका इतना गहरा प्रभाव क्यों है?

कई भारतीय दवा कंपनियां अमेरिकी बाजार से अच्छा-खासा मुनाफा कमाती हैं। सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला, ल्यूपिन, अरबिंदो फार्मा और ज़ाइडस लाइफसाइंसेज जैसी कंपनियां अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

सिंजीन, बायोकॉन, ग्लैंड फार्मा और पीरामल फार्मा भी अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका में बायोसिमिलर, जेनेरिक और विशेष दवाओं की आपूर्ति से प्राप्त करते हैं।

टैरिफ लगाने से इन कंपनियों के मुनाफे पर सीधा दबाव पड़ेगा और अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता कमजोर होगी।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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