RBI ने लॉन्च किया AI आधारित Digital Payments Intelligence Platform, अब रियल टाइम में रुकेगा ऑनलाइन फ्रॉड

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देश में बढ़ते डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। RBI एक नया “डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म” (DPIP) लॉन्च कर रहा है, जो पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित होगा। यह प्लेटफ़ॉर्म किसी भी संदिग्ध लेनदेन का तुरंत पता लगाएगा और धोखाधड़ी होने से पहले ही उसे रोक देगा। इस पहल का उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाना है।

यह नया प्लेटफ़ॉर्म क्या है और यह कैसे काम करेगा?

यह प्लेटफ़ॉर्म RBI के इनोवेशन हब द्वारा विकसित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में एक “नकारात्मक रजिस्ट्री” बनाई गई है। यह रजिस्ट्री दूरसंचार ऑपरेटरों और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से जानकारी एकत्र करके बनाई गई है ताकि धोखाधड़ी में शामिल व्यक्तियों या संस्थाओं की पहचान की जा सके।

इस पायलट प्रोजेक्ट में शुरुआत में पाँच बैंक शामिल थे, लेकिन अब इसे एक दर्जन से अधिक बैंकों तक विस्तारित किया जा रहा है। बैंक इस प्लेटफ़ॉर्म पर डेटा साझा कर रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी के पैटर्न की पहचान करने में काफी मदद मिल रही है।

रियल टाइम में धोखाधड़ी की रोकथाम

इस प्लेटफ़ॉर्म का दूसरा चरण जल्द ही शुरू किया जाएगा। दूसरे चरण में, AI मॉडल प्रत्येक लेनदेन का विश्लेषण करेगा और तुरंत एक “जोखिम स्कोर” प्रदान करेगा। यदि कोई लेनदेन उच्च जोखिम वाला है, तो प्लेटफ़ॉर्म तुरंत बैंकों को अलर्ट भेजेगा।

इसके बाद बैंक धोखाधड़ी रोकने के लिए आवश्यक कदम उठा सकेंगे। इन कदमों में अतिरिक्त सत्यापन और खातों से अस्थायी डेबिट शामिल होंगे। इस चरण में, बैंक धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी वास्तविक समय में प्लेटफ़ॉर्म के साथ साझा करेंगे।

संदेह होते ही, लेनदेन शुरू होने से पहले ही अलर्ट प्राप्त हो जाएगा

RBI के डिप्टी गवर्नर टी. रविशंकर ने कहा, “हम डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म को लागू कर रहे हैं। इसका प्रोटोटाइप हमारे इनोवेशन हब द्वारा विकसित किया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि इसके प्रबंधन के लिए एक अलग इकाई बनाई जा रही है।

इसका प्राथमिक उद्देश्य मुख्य खातों, दूरसंचार और भौगोलिक स्थान जैसे स्रोतों से डेटा एकत्र करना है। AI सिस्टम को इस डेटा पर प्रशिक्षित किया जाएगा। शंकर बताते हैं, “यदि सिस्टम किसी खतरे का पता लगाता है, तो यह लेनदेन से पहले एक अलर्ट भेजेगा। बैंक या ग्राहक तब यह तय कर सकते हैं कि लेनदेन को आगे बढ़ाना है या नहीं।”

चौंकाने वाले धोखाधड़ी के आँकड़े

इस प्लेटफ़ॉर्म का लॉन्च इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धोखाधड़ी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। वित्त वर्ष 2025 में, बैंकों ने कार्ड और इंटरनेट धोखाधड़ी के 13,516 मामले दर्ज किए, जिनकी कुल राशि ₹5.20 करोड़ थी। इनमें से ज़्यादातर धोखाधड़ी कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग जैसे डिजिटल माध्यमों से हुई।

आंकड़ों के अनुसार, जहाँ निजी बैंकों में डिजिटल धोखाधड़ी की सबसे ज़्यादा घटनाएँ होती हैं, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ज़्यादातर घटनाएँ उनकी ऋण पुस्तिकाओं से जुड़ी होती हैं।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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