UIDAI ने लॉन्च किया नया Aadhaar App: अब डिजिटल आधार से करें पहचान, शेयरिंग और वेरिफिकेशन

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UIDAI New Aadhaar App Launch: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने अपना नया आधार ऐप लॉन्च कर दिया है। UIDAI ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस नए ऐप के लॉन्च की घोषणा की। उन्होंने यह भी बताया कि अब से, हर कोई अपने आधार कार्ड को अपने फ़ोन पर डिजिटल रूप से स्टोर, शेयर और वेरिफाई कर सकेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि इस ऐप को Android और iOS दोनों यूज़र्स डाउनलोड कर सकते हैं। आइए नए आधार की मुख्य विशेषताओं के साथ-साथ अकाउंट कैसे सेटअप करें, इस पर भी नज़र डालते हैं।

नया आधार ऐप क्यों लॉन्च किया गया?

UIDAI का लक्ष्य हर नागरिक के लिए आधार को आसान बनाना है। लोगों को अक्सर पहचान के लिए अपने आधार कार्ड की एक कॉपी साथ रखनी पड़ती थी, लेकिन अब यह झंझट खत्म हो जाएगी। इस ऐप के साथ, यूज़र्स QR कोड या फेस ऑथेंटिकेशन का उपयोग करके अपनी पहचान डिजिटल रूप से वेरिफाई कर सकेंगे। इसका मतलब है कि अब उन्हें किसी भी कार्यालय, बैंक या सरकारी दस्तावेज़ पर सत्यापन के लिए अपना कार्ड दिखाने की ज़रूरत नहीं होगी।

ऐप कैसे सेटअप करें

  • सबसे पहले, Google Play Store या Apple App Store पर जाएँ और आधार ऐप डाउनलोड करें।
  • ऐप खोलें और ज़रूरी अनुमतियाँ दें।
  • अपना आधार नंबर दर्ज करें और नियम व शर्तें स्वीकार करें।
  • आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। उसे दर्ज करें।
  • इसके बाद, चेहरे से प्रमाणीकरण करें और एक सुरक्षा पिन सेट करें।
  • अब आपका आधार इस्तेमाल के लिए तैयार है।

आधार ऐप में ये खास सुविधाएँ

भारतीय नागरिक क्यूआर कोड के ज़रिए डिजिटल आधार साझा कर सकेंगे, जिससे भौतिक कार्ड की ज़रूरत खत्म हो जाएगी।

  • कस्टम डेटा शेयरिंग: उपयोगकर्ता यह तय कर पाएँगे कि कौन सी आधार जानकारी प्रदर्शित करनी है और कौन सी नहीं।
  • बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक: आप ऐप के अंदर से अपनी बायोमेट्रिक जानकारी लॉक या अनलॉक कर सकते हैं।
  • उपयोग इतिहास: ऐप दिखाएगा कि आपके आधार का कब और कहाँ इस्तेमाल किया गया था।
  • परिवार आधार प्रबंधन: आप परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड एक ही ऐप में स्टोर कर सकते हैं।

यह ऐप क्यों खास है?

नया आधार ऐप सिर्फ़ एक डिजिटल आईडी टूल नहीं है, बल्कि आपकी पहचान की सुरक्षा का एक नया तरीका है। डेटा शेयरिंग पर आपका पूरा नियंत्रण होगा। यूआईडीएआई का दावा है कि यह ऐप चेहरे की पहचान और क्यूआर-आधारित प्रमाणीकरण जैसी उच्च-सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल करता है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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