बॉलीवुड की चमक छोड़ कर साधना की राह अपनाई! बर्खा मदान की अनकही कहानी आज सबके सामने

By: MPLive Team

On: Wednesday, October 8, 2025 9:14 AM

बॉलीवुड की चमक छोड़ कर साधना की राह अपनाई! बर्खा मदान की अनकही कहानी आज सबके सामने
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बॉलीवुड की चमक-दमक और ग्लैमर हर किसी को अपनी ओर खींचता है। शोहरत, फैंस का प्यार और लाइमलाइट जीवन के हर पहलू को बदल देता है। लेकिन इस चमक-धमक भरी दुनिया में ऐसे भी कलाकार हैं, जो भीतर की शांति और आत्मा की खोज की तलाश में रहते हैं। ऐसी ही एक अभिनेत्री हैं बर्खा मदान, जिन्होंने न केवल अपनी ग्लैमरस ज़िंदगी को अलविदा कहा बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर धर्म और आध्यात्मिक साधना का मार्ग अपनाया। एक समय में रेड कार्पेट पर चलने वाली यह अभिनेत्री अब संयम, मौन और आत्मिक शांति से भरी ज़िंदगी जी रही हैं।

ग्लैमर से शुरू हुई यात्रा

बर्खा मदान का जीवन शुरू से ही असाधारण रहा। 1994 में उन्होंने मिस इंडिया कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया, जहां उन्हें “मिस टूरिज़्म इंडिया” का ताज पहनाया गया। इसके बाद मलेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पेजेंट में तीसरा स्थान प्राप्त किया। वे एक आत्मविश्वासी और आकांक्षी मॉडल थीं। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड की ओर कदम बढ़ाया। 1996 की सुपरहिट फिल्म “खिलाड़ियों का खिलाड़ी” में उन्होंने अक्षय कुमार, रेखा और रवीना टंडन के साथ काम किया। 2003 में राम गोपाल वर्मा की ‘भूत’ में उनका किरदार ‘मंजीत’ दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देने वाला था। टीवी की दुनिया में भी उन्होंने मजबूत उपस्थिति दर्ज की, लोकप्रिय शो जैसे ‘न्याय’, ‘1857 क्रांति’ (जहां उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभाई) और ‘सात फेरे’ में नजर आईं।

 

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भीतर की शांति ने बदला रास्ता

जितना बाहर सफलता मिली, उतना ही भीतर एक अनकहा बेचैनी महसूस होती रही। बर्खा अक्सर खुद से पूछती थीं, “क्या यही जीवन है?” सितारों के बीच रहते हुए भी वे अकेलापन महसूस कर रही थीं। उन्हें एक ऐसा खालीपन भरने की कोशिश करनी थी, जिसे न तो प्रसिद्धि और न ही पैसा भर सकता था। यहीं से उन्होंने अपने भीतर की आवाज़ सुननी शुरू की। बर्खा पहले से ही दलाई लामा की शिक्षाओं से प्रभावित थीं। धीरे-धीरे पुस्तकों के शब्द उनके भीतर उतरने लगे। वे केवल पढ़ नहीं रही थीं, बल्कि भीतर से बदल रही थीं।

अभिनेत्री से बौद्ध भिक्षु तक

2012 में बर्खा ने वह निर्णय लिया जो बहुत कम लोग ले पाते हैं। उन्होंने सपनों की दुनिया को अलविदा कह दिया और बौद्ध भिक्षु बनने का मार्ग अपनाया। अपने पुराने जीवन और पहचान को छोड़कर उन्होंने नया नाम ग्याल्टेन साम्टेन अपनाया। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, बल्कि जीवन बदलने वाला कदम था। अब वे हिमालय की शांत घाटियों में रहती हैं, जहां कोई स्क्रिप्ट, कोई कैमरा या संवाद नहीं—सिर्फ ध्यान, सेवा और आत्मा की खोज का मार्ग है। पहले रैंप पर चमकने वाली और सिल्वर स्क्रीन पर दम दिखाने वाली यह महिला अब बौद्ध परंपराओं को अपनाकर एक साधारण और संयमित जीवन जी रही हैं। वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं, जीवन अपडेट साझा करती हैं और लोगों को बौद्ध धर्म के बारे में शिक्षित करती हैं।

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