बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र का निधन, 89 साल की उम्र में खोया फिल्मिस्तान

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धर्मेंद्र: भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ को अंतिम सलाम

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्ष की उम्र में उनका निधन फिल्म उद्योग और करोड़ों प्रशंसकों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज करने वाले धर्मेंद्र ने न सिर्फ अपने अभिनय से, बल्कि अपनी सादगी और मानवीय स्वभाव से भी दर्शकों के दिल जीते।

लंबी बीमारी के बाद ली अंतिम सांस

धर्मेंद्र पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। सांस लेने में दिक्कत बढ़ने पर उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने के बाद परिवार उन्हें घर ले गया, जहां डॉक्टरों की विशेष देखरेख में उनका इलाज जारी था। 10 नवंबर को उनकी स्थिति गंभीर हो गई, और अंततः उन्होंने अंतिम सांस ली।

परिवार के साथ-साथ सलमान खान, शाहरुख खान, गोविंदा और कई बड़े सितारे भी उन्हें देखने अस्पताल पहुंचे थे।

एक साधारण युवक से सुपरस्टार बनने तक की कहानी

पंजाब के संगरूर में जन्मे धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1960 की फिल्म “दिल भी तेरा हम भी तेरे” से की थी। यह फिल्म तो खास नहीं चली, लेकिन उनकी प्रतिभा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।

1966 में आई फिल्म “फूल और पत्थर” उनकी जिंदगी का मोड़ साबित हुई। इसी फिल्म की सफलता के बाद उन्हें ‘ही-मैन ऑफ बॉलीवुड’ का खिताब मिला।

धर्मेंद्र की छवि एक एक्शन हीरो की रही, लेकिन साथ ही उन्होंने “चुपके चुपके”, “शोले”, “अनुपमा” और कई रोमांटिक व कॉमिक फिल्मों में भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई।

सिनेमा का अमर किरदार: वीरू

1975 में आई “शोले” में धर्मेंद्र का निभाया ‘वीरू’ किरदार आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में शामिल है। उनकी टाइमिंग, संवाद अदायगी और प्राकृतिक अभिनय शैली ने उन्हें आम दर्शकों के बेहद करीब ला खड़ा किया।

व्यक्तित्व जिसने सबको अपना बना लिया

धर्मेंद्र न सिर्फ शानदार अभिनेता थे, बल्कि जमीन से जुड़े, सहज और बेहद विनम्र इंसान भी थे। यही वजह है कि हर पीढ़ी के कलाकार और दर्शक उन्हें सम्मान की नजर से देखते हैं।

उनका एक-एक अंदाज़, उनकी मुस्कान और फिल्मों में दिखा मासूम रोमांस आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है।

अधूरी हो गई एक पीढ़ी की यादें

धर्मेंद्र के निधन के साथ हिंदी फिल्म जगत का एक स्वर्णिम अध्याय खत्म हो गया। उनके योगदान, उनकी फिल्मों और उनकी इंसानियत को आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा याद रखेंगी।

धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि—
फिल्म उद्योग ने एक चमकता सितारा खो दिया, लेकिन उनकी रोशनी हमेशा हमारे दिलों में बनी रहेगी।


देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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