ब्रिटिश काल में बने रायसीना हिल्स स्थित नॉर्थ ब्लॉक से गृह मंत्रालय (MHA) का स्थानांतरण अब शुरू हो गया है। यह स्थानांतरण मोदी सरकार की सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत किया जा रहा है, जिसके माध्यम से राजधानी के हृदय स्थल को नया स्वरूप देने की योजना बनाई गई है। नए भवन CCS-3, जो कर्तव्य पथ पर इंडिया गेट के पास स्थित है, में गृह मंत्रालय को शिफ्ट किया जा रहा है। यह कदम नई दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में अहम माना जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने किया नए भवन में स्थानांतरण
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, कुछ संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी एवं उनका स्टाफ पहले ही नए CCS-3 भवन में स्थानांतरित हो चुके हैं। बाकी अधिकारी और अन्य स्टाफ भी अगले कुछ दिनों में नए भवन में स्थानांतरित किए जाएंगे। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कार्यालय अभी शिफ्ट नहीं हुआ है, लेकिन इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गृह मंत्रालय को नए भवन में लगभग 350 कक्ष आवंटित किए गए हैं, जहां से मंत्रालय का संचालन किया जाएगा।

90 वर्षों से नॉर्थ ब्लॉक रहा गृह मंत्रालय का मुख्यालय
लाल बलुआ पत्थरों से बना रायसीना हिल्स का नॉर्थ ब्लॉक पिछले 90 वर्षों से गृह मंत्रालय का मुख्यालय रहा है। यह भवन देश की प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्र बिंदु रहा है। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत जब नए भवन पूरी तरह तैयार हो जाएंगे, तब प्रधानमंत्री कार्यालय समेत गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण कार्यालयों के लिए उपयोग में लाए जा रहे नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक पूरी तरह खाली कर दिए जाएंगे। इसके बाद इन भवनों का स्वरूप बदलकर एक नए राष्ट्रीय धरोहर स्थल में परिवर्तित किया जाएगा।
नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में बनेगा विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय
सरकार की योजना के अनुसार, कार्यालयों के पूरी तरह खाली होने के बाद नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में ‘युगे युगेन भारत’ नाम से एक विशाल संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा। यह संग्रहालय लगभग 1.55 लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल और 950 कक्षों में स्थापित किया जाएगा, जो दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक होगा। इस संग्रहालय में भारत के इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम की कहानियों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यम से दिखाया जाएगा। यह कदम भारत के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।







