मुंबई में चल रहे हिंदी बनाम मराठी विवाद की गर्मी अब दिल्ली की संसद तक पहुंच गई है। महाराष्ट्र की कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने दावा किया कि उन्होंने संसद भवन की लॉबी में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को घेर लिया और उनसे महाराष्ट्र को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर सवाल किए। इस पूरी घटना में दुबे की प्रतिक्रिया और उनके ‘जय महाराष्ट्र’ बोलकर निकल जाने को लेकर खूब चर्चा हो रही है।
क्या कहा कांग्रेस सांसदों ने?
वर्षा गायकवाड़ के मुताबिक उन्होंने और अन्य महिला सांसदों ने निशिकांत दुबे से पूछा कि उन्होंने महाराष्ट्र और मराठी लोगों के खिलाफ ऐसा बयान क्यों दिया। सांसदों ने दुबे से सीधा सवाल किया – “किसे मारोगे आप?” इस सवाल से दुबे एकदम घबरा गए और बोले – “नहीं, नहीं, जय महाराष्ट्र।” इसके बाद वह वहां से निकल गए। इस बयान के बाद मौके पर और सांसद भी जमा हो गए और माहौल गरमा गया।

विवाद की जड़ में क्या है?
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से मुंबई में मराठी बनाम हिंदी भाषियों को लेकर तनाव बना हुआ है। मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा हिंदी बोलने वालों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। इसी के जवाब में निशिकांत दुबे ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि “अगर हिम्मत है तो मराठी लोग उर्दू, तमिल या तेलुगु वालों को भी मारें। अगर इतने ही ‘बॉस’ हो तो महाराष्ट्र से निकलो और बिहार-यूपी आओ। वहां तुमको पटक पटक के मारेंगे।”
बयान ने मचाया राजनीतिक बवाल
निशिकांत दुबे का बयान सामने आते ही पूरे महाराष्ट्र में राजनीति गरमा गई। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे मराठी अस्मिता पर हमला बताया। बीएमसी चुनावों को नजदीक बताते हुए दुबे ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर ‘सस्ती राजनीति’ करने का आरोप भी लगाया। इस बयान से न सिर्फ राजनीतिक भूचाल आया बल्कि महाराष्ट्र बनाम उत्तर भारत का तनाव भी गहराता दिखा।
संसद में यह पहली बार नहीं
यह पहली बार नहीं है जब भाषाई या प्रांतीय विवाद संसद तक पहुंचा हो। इससे पहले भी तमिल बनाम हिंदी, बंगाली बनाम हिंदी जैसे मुद्दों पर संसद में बहस हो चुकी है। लेकिन इस बार मामला महिलाओं सांसदों के आक्रामक रुख और बीजेपी सांसद की प्रतिक्रिया को लेकर अधिक ध्यान खींच रहा है। यह विवाद आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति पर खास असर डाल सकता है।







