अमेरिका से विमानन इंजन की आपूर्ति में देरी के बावजूद हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारतीय वायुसेना को दो एडवांस वर्जन लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस मार्क-1ए सौंपने जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष (2025-26) में अमेरिका की जीई कंपनी को 12 इंजन सप्लाई करने थे, लेकिन अब तक केवल दो ही इंजन भारत को मिले हैं। इसी कारण एलसीए तेजस परियोजना निर्धारित समय से पीछे चल रही है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने सार्वजनिक रूप से इस धीमी प्रगति पर असंतोष भी जताया है।
सितंबर में मिसाइल फायरिंग टेस्ट, वायुसेना को मिलेंगे दो विमान
जानकारी के मुताबिक, सितंबर 2025 में तेजस मार्क-1ए का फायरिंग टेस्ट किया जाएगा। इस दौरान स्वदेशी अस्त्र (बियॉन्ड विजुअल रेंज) मिसाइल और शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण पूरा होते ही HAL द्वारा तैयार दो विमान भारतीय वायुसेना को सौंप दिए जाएंगे। हालांकि HAL का दावा है कि यदि इंजन की आपूर्ति नियमित रूप से होती रही तो मार्च 2026 तक 10 विमान वायुसेना को दिए जा सकते हैं। जुलाई में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा ने खुद HAL की बेंगलुरु सुविधा का दौरा कर इस परियोजना की समीक्षा की थी।

सरकार ने 97 अतिरिक्त स्वदेशी लड़ाकू विमान खरीद को मंजूरी दी
इंजन आपूर्ति में बाधा के बावजूद केंद्र सरकार ने पिछले महीने वायुसेना के लिए 97 अतिरिक्त स्वदेशी लड़ाकू विमानों की खरीद को हरी झंडी दी। दरअसल, साल 2021 में रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 83 तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों के लिए 48 हजार करोड़ रुपये का बड़ा समझौता किया था। इन विमानों को उड़ान देने के लिए भारत ने अमेरिकी कंपनी GE से 99 F-404 विमानन इंजनों की खरीद का करार किया था। लेकिन अब लगातार देरी इस परियोजना को प्रभावित कर रही है।
इंजन सप्लाई पर अमेरिकी सफाई और भू-राजनीतिक कारण
पिछले डेढ़ साल से इंजन आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है। अमेरिका का दावा है कि यह देरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण हो रही है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि हाल ही में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश, अमेरिका-भारत के बीच टैरिफ युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर जैसे भू-राजनीतिक कारण भी इसमें भूमिका निभा रहे हैं। अब तक केवल दो इंजन ही भारत पहुंचे हैं, जबकि बाकी की आपूर्ति अधर में है। इसके बावजूद भारत सरकार और HAL दोनों ने स्पष्ट कर दिया है कि तेजस परियोजना की गति किसी भी हाल में धीमी नहीं पड़ेगी।







