कोल इंडिया की अंतरिम कोयला नीति पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक रुख, निजी कंपनियों को रिफंड का नहीं मिलेगा आदेश

By: MPLive Team

On: Saturday, September 13, 2025 12:17 PM

कोल इंडिया की अंतरिम कोयला नीति पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक रुख, निजी कंपनियों को रिफंड का नहीं मिलेगा आदेश
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोल इंडिया लिमिटेड की 2006 में बनाई गई अंतरिम कोयला नीति को वैध घोषित किया। इस नीति के तहत गैर-कोर सेक्टर उद्योगों को आपूर्ति किए जाने वाले कोयले की कीमत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। कोलकाता हाईकोर्ट ने 2012 में इस नीति को असंवैधानिक करार दिया था, जिसे कोल इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय को खारिज करते हुए कहा कि अंतरिम कोयला नीति पूरी तरह से वैध है।

हाईकोर्ट का निर्णय खारिज

कोल इंडिया की अंतरिम कोयला नीति पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और आर. महादेवन शामिल थे, ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में गंभीर त्रुटि की। न्यायमूर्ति परदीवाला ने 128 पेज के फैसले में लिखा कि गैर-कोर सेक्टर उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी का उद्देश्य केवल कोयले की आपूर्ति बनाए रखना और सभी उपभोक्ताओं के लिए बाजार में कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करना था। इसका मकसद लाभ कमाना नहीं था।

कोल इंडिया की अंतरिम कोयला नीति पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक रुख, निजी कंपनियों को रिफंड का नहीं मिलेगा आदेश

तीन मुख्य मुद्दों पर कोर्ट की व्याख्या

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीन मुख्य सवालों पर विचार किया। पहला सवाल यह था कि क्या कोल इंडिया को अंतरिम कोयला नीति लागू करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि कोल इंडिया को कीमतों को नियंत्रित करने का अधिकार है। दूसरा सवाल था कि गैर-कोर सेक्टर के उपभोक्ताओं के लिए 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के तहत वैध है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोर और गैर-कोर सेक्टर के बीच वर्गीकरण पूरी तरह सही और उचित है।

लाभ के मकसद से नहीं हुई थी मूल्य वृद्धि

फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं था। यह कदम कोयले की आपूर्ति बनाए रखने और बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अंतरिम कोयला नीति को असंवैधानिक माना जाता, तब भी अतिरिक्त 20 प्रतिशत राशि की वापसी का आदेश नहीं दिया जाता।

कोल इंडिया और उद्योगों के लिए राहत

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कोल इंडिया और उद्योगों दोनों के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आया है। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि सरकार या राज्य नियंत्रित उपक्रमों द्वारा मूल्य निर्धारण के नियमों का उद्देश्य केवल बाजार में स्थिरता और आपूर्ति सुनिश्चित करना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि गैर-कोर सेक्टर उपभोक्ताओं को इस बढ़ोतरी के कारण किसी प्रकार का लाभ देने का आदेश नहीं मिलेगा। इस निर्णय से उद्योग जगत में निश्चितता और नीतिगत स्पष्टता बनी है।

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