सोमवार तड़के अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग ज़िले में भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह भूकंप सुबह 3:01:17 बजे दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.2 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र अपर सियांग क्षेत्र में था और इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है। झटके 29.06 अक्षांश और 94.45 देशांतर पर महसूस किए गए। सौभाग्य से इस भूकंप से अब तक किसी भी तरह की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
गुजरात के कच्छ में लगातार भूकंप के झटके
अरुणाचल से पहले रविवार को गुजरात के कच्छ ज़िले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। दोपहर 12:41 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 3.1 मापी गई और इसका केंद्र भुज जिले के भचाऊ से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। दिलचस्प बात यह रही कि सुबह 6:41 बजे भी कच्छ में 2.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसका केंद्र धोलावीरा से 24 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था। लगातार छोटे-छोटे भूकंपों ने स्थानीय लोगों में हल्की चिंता जरूर पैदा की, हालांकि किसी तरह की क्षति की सूचना सामने नहीं आई।
उच्च जोखिम वाले भूकंपीय क्षेत्र में कच्छ
कच्छ ज़िला भारत के उन क्षेत्रों में आता है, जो उच्च जोखिम भूकंपीय क्षेत्र (High-Risk Seismic Zone) में गिने जाते हैं। यहाँ पर हल्की तीव्रता के भूकंप अक्सर महसूस किए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज़ से काफी संवेदनशील है और छोटे झटके यहाँ सामान्य घटना हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी के अनुसार, रविवार को आए भूकंपों से किसी भी तरह के नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली, लेकिन लगातार होने वाली हलचलें इस क्षेत्र के भूगर्भीय सक्रियता की पुष्टि करती हैं।
2001 का कच्छ भूकंप – एक विनाशकारी याद
जब भी कच्छ में भूकंप का ज़िक्र होता है, लोगों के मन में सबसे पहले 2001 का विनाशकारी भूकंप ताज़ा हो जाता है। यह भूकंप भारत के इतिहास में तीसरा सबसे बड़ा और दूसरा सबसे विनाशकारी भूकंप माना जाता है। इस आपदा ने कच्छ के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया था। हजारों कस्बे और गाँव लगभग पूरी तरह नष्ट हो गए थे। उस समय लगभग 13,800 लोगों की मौत हुई थी और करीब 1.67 लाख लोग घायल हुए थे। उस भयावह घटना की याद आज भी स्थानीय लोगों को झकझोर देती है और हर नया झटका उन्हें उस त्रासदी की याद दिला देता है।







