केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवांकुट्टी ने हिजाब विवाद पर स्पष्ट बयान जारी किया है। उन्होंने कहा, “मामला समाप्त हो गया है। इसे आज सुबह लगभग 11 बजे सुलझा लिया गया। मैं इस विषय पर और कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। जो कहना आवश्यक था, वह पहले ही कह दिया गया है। इस समय और कुछ कहने से केवल अनावश्यक समस्याएँ उत्पन्न होंगी।” उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार ने विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया है और अब इसे बढ़ावा देने की आवश्यकता नहीं है।
केरल हिजाब विवाद क्या है?
हालिया घटना कोच्चि (एर्नाकुलम जिला) के पल्लुरुथी क्षेत्र में स्थित सेंट रिटा पब्लिक स्कूल से जुड़ी है। यह स्कूल लैटिन कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित एक अल्पसंख्यक सीबीएसई संस्थान है। स्कूल की आठवीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा ने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही स्कूल की ड्रेस कोड का पालन किया, लेकिन 7 अक्टूबर 2025 को वह पहली बार हिजाब पहनकर स्कूल आई। स्कूल प्रशासन ने इसे यूनिफॉर्म नियमों का उल्लंघन मानते हुए उसे कक्षा में प्रवेश नहीं दिया।
स्कूल ने 2018 केरल हाईकोर्ट के फैसले (फातिमा थसनीम बनाम राज्य केरल) का हवाला देते हुए कहा कि व्यक्तिगत धार्मिक अधिकार संस्थागत अनुशासन के ऊपर नहीं जा सकते। इस फैसले के आधार पर स्कूल ने हिजाब पर रोक लगाई।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
शिक्षा मंत्री वी. शिवांकुट्टी ने स्कूल की कार्रवाई की आलोचना की और कहा, “कोई भी स्कूल छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता। यह साम्प्रदायिक ताकतों की साजिश है। छात्रों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने इस मामले को ध्यान से देखा और छात्रा के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाए।
शिवांकुट्टी ने स्कूलों और खेल आयोजनों के संबंध में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चीफ मिनिस्टर ट्रॉफी को थट्टाथुमाला में रविवार को प्राप्त किया जाएगा और स्वागत समारोह विभिन्न स्कूलों में आयोजित होंगे। 12 स्टेडियम में 41 इवेंट्स में प्रतियोगिताएँ होंगी और इस बार कलारिपयट्टू को भी शामिल किया गया है।
खेल आयोजन और शिक्षक सहयोग
शिक्षा मंत्री ने खेल आयोजनों में शिक्षकों के सहयोग की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “फिजिकल एजुकेशन टीचर्स पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनके अधिकांश मांगों को पूरा कर दिया गया है। यदि पूछा जाए कि क्या वे हड़ताल पर हैं, तो उत्तर ‘नहीं’ होगा; लेकिन यदि पूछा जाए कि क्या वे सहयोग कर रहे हैं, तो उत्तर ‘नहीं’ ही होगा। उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।”
इस पूरे विवाद और शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने छात्रा के अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ खेल और शिक्षा कार्यक्रमों की सुचारू संचालन पर भी ध्यान केंद्रित किया है। शिवांकुट्टी का उद्देश्य न केवल विवाद को शांत करना है, बल्कि शिक्षा और खेल के क्षेत्र में राज्य की प्रतिबद्धता को बनाए रखना भी है।







