दुनिया भर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डीपफेक वीडियो और फर्जी कंटेंट तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे में सरकारें अब इस खतरे को रोकने की तैयारी में जुट गई हैं। हाल ही में भारत सरकार ने डीपफेक कंटेंट को नियंत्रित करने की योजना की घोषणा की है ताकि लोगों को झूठी जानकारी से बचाया जा सके।
चीन का सख्त कानून और नई शर्तें
भारत के पड़ोसी देश चीन ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वहां अब किसी भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या कंटेंट क्रिएटर को अपने एआई से बने वीडियो या पोस्ट पर यह साफ तौर पर लिखना होगा कि यह एआई जनरेटेड है। अगर कोई ऐसा नहीं करता या जानबूझकर लेबल हटाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह नियम साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना के तहत लागू किया गया है।

‘क्लीन एंड ब्राइट’ अभियान का लक्ष्य
चीन ने इस पहल को अपने “क़िंगलांग” यानी “क्लीन एंड ब्राइट” नामक अभियान का हिस्सा बताया है। इस अभियान का उद्देश्य इंटरनेट पर फैल रही अफवाहों और गलत सूचनाओं को रोकना है। सरकार ने कहा है कि सेवा प्रदाताओं को ऐसे सभी एआई कंटेंट के रिकॉर्ड छह महीने तक संभालकर रखने होंगे। इस कदम से ऑनलाइन पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
यूरोप और भारत की तैयारी भी जारी
यूरोपीय संघ ने भी एआई से जुड़ा एक नया कानून पारित किया है जिसे “एआई एक्ट” कहा जाता है। इस कानून के तहत भी यह अनिवार्य है कि हर एआई आधारित कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाया जाए। भारत में भी एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए कई नीतियां बनाई गई हैं जिनमें “नेशनल स्ट्रैटेजी फॉर एआई 2018”, “प्रिंसिपल्स फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई 2021” और “ऑपरेशनलाइजिंग प्रिंसिपल्स फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई” शामिल हैं।
भविष्य में एआई नियंत्रण की दिशा
हालांकि भारत में अभी तक इन कानूनों को सख्ती से लागू नहीं किया गया है लेकिन यह कदम एआई के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। डीपफेक जैसे तकनीकी धोखे आम यूजर्स को भ्रमित कर रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि एआई पर नियंत्रण के साथ-साथ लोगों को इसके सही उपयोग की जानकारी भी दी जाए ताकि तकनीक का लाभ समाज तक सही रूप में पहुंच सके।







