दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार शाम हुए कार बम विस्फोट की जांच अभी भी जारी है। इस विस्फोट में अब तक बारह लोगों की मौत हो चुकी है जबकि बीस से अधिक लोग घायल हैं और अस्पतालों में इलाजरत हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर गहनता से जांच कर रही हैं। दिल्ली पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने विस्फोट से जुड़े तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर फोकस करना शुरू कर दिया है। आइए जानें कि ये तीन मुख्य बातें क्या हैं।
पहला अहम सवाल: डॉक्टर उमर के तीन घंटे कहां बीते?
डॉक्टर उमर ने अपनी कार लाल किले के पार्किंग क्षेत्र में दोपहर 3:19 बजे पार्क की थी। कार वहां से शाम 6:22 बजे निकली। इन तीन घंटों के बीच डॉक्टर उमर कहां थे? क्या वे पार्किंग क्षेत्र में ही थे या किसी से मिल रहे थे? क्या वह इलाके का रेक्की कर रहे थे, ताकि जब भीड़ ज्यादा हो तब हमला किया जा सके? पुलिस के अनुसार उमर को पता था कि उसके साथियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पुलिस उसे भी कभी भी पकड़ सकती है। फिर भी उसने हाई सिक्योरिटी इलाके में तीन घंटे तक कैसे रहा? क्या वह किसी सप्लीमेंट्री सपोर्ट या स्लीपर सेल के आने का इंतजार कर रहा था? इस समय के दौरान क्या उसने किसी से संपर्क किया या किसी के निर्देश का इंतजार कर रहा था? ये सवाल जांच के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।
दूसरा पहलू: नेटवर्क और हथियारों का स्रोत
जांच में यह भी सामने आया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद के तीन डॉक्टरों के नाम इस मामले में जुड़े हैं। इसके अलावा इस नेटवर्क में और कितने सक्रिय या निष्क्रिय सदस्य, जिन्हें स्लीपर सेल भी कहा जाता है, शामिल थे? इतने हथियार और विस्फोटक कहां से आए? क्या ये विस्फोटक एक साथ आए या अलग-अलग समय पर विभिन्न कंसाइनमेंट के रूप में? उन्हें कौन सप्लाई कर रहा था? साथ ही, इन संदिग्धों का टेलीग्राम ग्रुप कौन-कौन से लोग जुड़े थे और यह ग्रुप कितने समय से सक्रिय था? क्या उमर, मुजमिल या आदिल खुद दिल्ली में रेक्की कर रहे थे या उनका कोई अन्य सहयोगी यह काम कर रहा था? इन सवालों के जवाब खोजना जांच का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
तीसरा सवाल: विस्फोट का तरीका और प्रभाव
दिल्ली में अब तक हुए अधिकांश बम धमाकों में नाखून, बॉल बेयरिंग्स, तेज धार वाले ब्लेड जैसे ब्लंट ऑब्जेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया ताकि विस्फोट का प्रभाव ज्यादा और व्यापक हो। लेकिन इस विस्फोट में ऐसा कुछ नहीं मिला। पुलिस ने अभी तक विस्फोट स्थल पर कोई भी ब्लंट ऑब्जेक्ट नहीं पाया है। फिर सवाल उठता है कि इतनी ताकतवर धमाका कैसे हुआ जबकि सड़क पर विस्फोट का कोई गड्ढा या क्रेटर नहीं बना, जो आमतौर पर विस्फोट स्थलों पर देखा जाता है। हालांकि, विस्फोट के कारण आसपास की कई गाड़ियां पूरी तरह तबाह हो गईं, सिर्फ उस गाड़ी की ही नहीं जिसमें विस्फोट हुआ था। यह विस्फोट की तकनीक और विस्फोटक सामग्री के प्रकार को लेकर जांच में एक बड़ा रहस्य है।







