BLOs Death: देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कैंपेन के बीच बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की मौतों और आत्महत्याओं ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। पिछले 19 दिनों में छह राज्यों में 15 BLOs की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि चुनावी सिस्टम में बढ़ते काम के बोझ और मानसिक दबाव पर बड़े सवाल भी खड़े करता है।
काम का बोझ और तनाव बना मौतों की वजह?
SIR प्रोसेस के तहत BLOs को घर-घर जाकर फॉर्म भरना, दस्तावेजों की जांच, डिजिटाइजेशन, लगातार रात में ऑनलाइन मीटिंग और तय टारगेट पूरा करना होता है। कई परिवारों ने आरोप लगाया है कि इतना अधिक काम और लगातार दबाव ही मौतों और सुसाइड की असली वजह है।
पश्चिम बंगाल: तीसरी मौत, दूसरी सुसाइड
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में BLO रिंकू की लाश घर की छत से लटकी मिली। पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ। यह राज्य में SIR से जुड़ी दूसरी आत्महत्या और कुल मिलाकर तीसरी मौत है।
TMC ने इस घटनाक्रम के लिए सीधे SIR प्रोसेस को जिम्मेदार बताते हुए चुनाव आयोग की आलोचना की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा कि BLOs पर काम का बोझ अत्यधिक है और यह उन्हें मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है।
राजस्थान: एक दिन में दो मौतें, एक सुसाइड
जयपुर में BLO मुकेश जांगिड़ (48) ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। करौली में एक BLO की मौत हो गई, जबकि सवाई माधोपुर में एक अन्य BLO को हार्ट अटैक आया। राजस्थान में SIR डिजिटाइजेशन 60.54% तक पहुंच चुका है, जो देश में सबसे अधिक है, लेकिन यह प्रदर्शन भारी दबाव की सच्चाई भी उजागर करता है।
गुजरात: चार दिनों में चार मौतें
गुजरात में चार दिनों के भीतर चार BLOs की मौत ने प्रशासन को भी हिलाकर रख दिया है। अहमदाबाद के फारूक और दाहोद के बचुभाई अभी भी भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
मध्य प्रदेश: एक रात में दो मौतें, एक लापता, दो को हार्ट अटैक
मध्य प्रदेश की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है।
- रायसेन में BLO रमाकांत पांडे की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
- दमोह के सीताराम गैंड (50) की भी फॉर्म भरते समय हालत खराब हुई और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
- रायसेन के BLO नारायण सोनी छह दिन से लापता हैं। परिजनों का आरोप है कि टारगेट पूरा न होने और रातभर मीटिंग के दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।
- भोपाल में दो BLO—कीर्ति कौशल और मोहम्मद लाइक— को ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आया।
ईसी की रिपोर्ट—फॉर्म बांटे गए 98.98%, डिजिटाइजेशन में भारी अंतर
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 98.98% फॉर्म बांटे जा चुके हैं। जबकि डिजिटाइजेशन के मामले में राज्यों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है—
- राजस्थान: 60.54%
- केरल: 10.58% (सबसे कम)
यह आंकड़ा दर्शाता है कि कई राज्यों में BLOs पर अत्यधिक बोझ पड़ा है, जबकि कुछ राज्यों में प्रक्रिया धीमी है।
बढ़ती मौतों ने उठाए बड़े सवाल
लगातार हो रही मौतों और आत्महत्याओं ने दो प्रमुख सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या SIR कैंपेन BLOs को ओवरलोड कर रहा है?
- क्या सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चुनाव व्यवस्था में गंभीर खामियां मौजूद हैं?
परिजनों का कहना है कि BLOs के लिए काम का ढांचा मानवीय नहीं है और लगातार मीटिंग, टारगेट व दबाव ने कई लोगों की जान ले ली।
सुधार की जरूरत—न सिर्फ डेटा, बल्कि मानव जीवन भी महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग को SIR जैसे बड़े कैंपेन के दौरान BLOs की कार्य स्थितियों, स्वास्थ्य सुरक्षा और तनाव को प्राथमिकता देनी चाहिए। सिस्टम तभी प्रभावी होगा जब वह कर्मचारियों के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य का सम्मान करे।
SIR कैंपेन की यह घटनाएं चेतावनी देती हैं कि चुनाव सुधारों में डेटा और डिजिटाइजेशन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उन लोगों की सुरक्षा भी, जो इस प्रक्रिया को जमीन पर लागू करते हैं।







