महाराष्ट्र सरकार के अधीन है BMC, मेयर नहीं बल्कि नगर आयुक्त करता है नियंत्रण

By: MPLive Team

On: Thursday, January 22, 2026 3:18 PM

महाराष्ट्र सरकार के अधीन है BMC, मेयर नहीं बल्कि नगर आयुक्त करता है नियंत्रण
Google News
Follow Us
---Advertisement---

महाराष्ट्र की 29 नगर पालिकाओं में मेयर चुनाव का दौर चल रहा है। इस साल मुंबई मेयर का पद जनरल कैटेगरी की उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया गया है, साथ ही बीएमसी में महिला मेयर के लिए लॉटरी सिस्टम लागू करने का ऐलान भी किया गया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर बीएमसी को असल में कौन नियंत्रित करता है? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्र सरकार बीएमसी के कामकाज में दखल दे सकते हैं? दरअसल, बीएमसी केंद्र सरकार के अधीन नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। संविधान की दृष्टि से नगर निगम जैसी शहरी स्थानीय निकायें केंद्र की सूची (यूनियन लिस्ट) में नहीं बल्कि राज्य की सूची (स्टेट लिस्ट) में आती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि बीएमसी के प्रशासन, वित्तीय फैसले और शासन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास होती है। मुंबई नगर निगम अधिनियम 1888 के तहत बीएमसी का संचालन होता है, जिससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय केंद्र के बजाय राज्य सरकार द्वारा लिए जाते हैं।

BMC का असली शक्तिप्रदायक: नगर आयुक्त

BMC में सबसे ताकतवर पद मेयर का नहीं बल्कि नगर आयुक्त का होता है। नगर आयुक्त निगम का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है और वह रोजाना के प्रशासन, वित्त, टेंडर प्रक्रिया और प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालता है। खास बात यह है कि नगर आयुक्त की नियुक्ति महाराष्ट्र सरकार द्वारा सीधे की जाती है। वह प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार को नहीं बल्कि राज्य के शहरी विकास विभाग और अंततः मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करता है। इसलिए यह स्पष्ट है कि बीएमसी का प्रशासन और नीति निर्धारण पूरी तरह से राज्य सरकार के नियंत्रण में है, और केंद्र का दखल सीमित है।

प्रधानमंत्री सीधे बीएमसी में दखल नहीं दे सकते

भारत के संवैधानिक ढांचे के अनुसार प्रधानमंत्री या उनका कार्यालय किसी भी नगर निगम को सीधे आदेश देने का अधिकार नहीं रखता। ऐसा करना संघीय व्यवस्था के तहत केंद्र और राज्य के बीच शक्तियों के संतुलन का उल्लंघन होगा। हालांकि, केंद्र सरकार अप्रत्यक्ष रूप से शहरी शासन पर प्रभाव डालती है। यह प्रभाव स्मार्ट सिटी मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, अमृत योजना, शहरी परिवहन एवं आवास कार्यक्रम जैसे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से होता है। इन योजनाओं के तहत केंद्र वित्तीय सहायता प्रदान करता है और नीतिगत दिशा-निर्देशन करता है, लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण राज्य सरकार के पास ही रहता है।

अनुच्छेद 256 के तहत केंद्र की सीमित शक्तियां

कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 256 के तहत अधिकार प्राप्त हैं, जिससे वह यह सुनिश्चित कर सकती है कि राज्य सरकारें संसदीय कानूनों का पालन करें। इस अनुच्छेद के तहत केंद्र राज्य सरकार को निर्देश दे सकता है ताकि कोई भी राज्य केंद्र के बनाए गए कानूनों की अवहेलना न करे। परन्तु यह अधिकार केवल कानून के पालन तक सीमित है और इसका मतलब यह नहीं कि केंद्र सीधे बीएमसी के प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है। इस तरह से, बीएमसी का वास्तविक नियंत्रण महाराष्ट्र सरकार के हाथ में होता है और केंद्र सरकार का दखल केवल योजना और नीति के स्तर तक सीमित रहता है।

For Feedback - devendra.abpnews@gmail.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment