Budget 2026: क्या बजट में कम होगी सोने-चांदी और मेटल्स पर ड्यूटी, वित्तमंत्री कर सकती है ऐलान

By: MPLive Team

On: Saturday, January 24, 2026 11:31 AM

Budget 2026: क्या बजट में कम होगी सोने-चांदी और मेटल्स पर ड्यूटी, वित्तमंत्री कर सकती है ऐलान
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देश के कीमती धातु (सोना-चांदी) रिफाइनिंग सेक्टर ने बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें लगा रखी हैं. देश की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनी MMTC-PAMP ने सरकार से मांग की है कि घरेलू रिफाइनर्स और आयातित बुलियन (तैयार सोना-चांदी) के बीच ड्यूटी में बराबरी लाई जाए, ताकि भारतीय उद्योग को प्रतिस्पर्धा में नुकसान न झेलना पड़े. कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ समीत गुहा ने कहा कि मौजूदा ड्यूटी स्ट्रक्चर घरेलू रिफाइनर्स के लिए चुनौती बन गया है.

MMTC-PAMP तक सीमित नहीं
समीत गुहा के अनुसार, यह समस्या सिर्फ MMTC-PAMP तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा प्रेशियस मेटल रिफाइनिंग सेक्टर लंबे समय से ड्यूटी में असमानता का सामना कर रहा है. खासकर SEPA रूट के जरिए कच्चे सोने-चांदी (डोरे) के आयात और तैयार बुलियन के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में अंतर घरेलू रिफाइनर्स को कमजोर स्थिति में डाल देता है. इसका असर यह होता है कि विदेशी कंपनियों से आने वाला तैयार बुलियन कई बार सस्ता पड़ता है, जिससे भारतीय रिफाइनर्स की प्रतिस्पर्धा क्षमता घटती है.

उन्होंने बताया कि SEPA के बाद जिन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) पर हस्ताक्षर हुए हैं, उनमें बुलियन को कम ड्यूटी वाले दायरे से बाहर रखा गया है. इंडस्ट्री चाहती है कि आगे होने वाले समझौतों में भी सोना और चांदी को इस तरह की छूट न दी जाए, ताकि घरेलू उद्योग को संरक्षण मिल सके.

गुहा का कहना है कि अगर भारत को रिफाइनिंग के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है और ज्यादा से ज्यादा LBMA (लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन) मान्यता प्राप्त रिफाइनर्स तैयार करने हैं, तो सरकार को इनपुट से जुड़े लाभ देने होंगे. यह लाभ ड्यूटी डिफरेंशियल बढ़ाकर या नीति में बदलाव के जरिए दिया जा सकता है. इससे घरेलू कंपनियों को निवेश बढ़ाने, बेहतर रिटर्न पाने और अपनी तकनीकी क्षमता सुधारने का प्रोत्साहन मिलेगा.

सोने और चांदी पर इतन ड्यूटी
वर्तमान में सोना और चांदी के डोरे पर 6% ड्यूटी लगती है, जबकि रिफाइनर्स को 0.65% का डिफरेंशियल मिलता है, जिससे प्रभावी ड्यूटी 5.35% रह जाती है. MMTC-PAMP मुख्य रूप से डोरे के रूप में सोने का आयात करती है. वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने करीब 40 टन सोना और 50 टन चांदी आयात की थी. चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान कंपनी ने 36 टन सोना और 60 टन चांदी आयात की, जो चांदी की मजबूत मांग को दर्शाता है. उद्योग का मानना है कि यदि बजट 2026 में सरकार ड्यूटी से जुड़ी इस असमानता को दूर करती है, तो इससे घरेलू रिफाइनिंग सेक्टर को बड़ा बल मिलेगा और भारत वैश्विक रिफाइनिंग हब के रूप में उभर सकता है.

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