प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को वैश्विक व्यापार के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना करार दिया है। इंडिया एनर्जी वीक के मंच से पीएम मोदी ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) कहते हुए स्पष्ट किया कि यह समझौता सिर्फ व्यापारिक आकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के भरोसे का प्रतीक है। यह डील करीब 18 साल के लंबे इंतजार और 2007 से चल रही बातचीत के बाद मुकम्मल हुई है।
ग्लोबल इकोनॉमी पर असर यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। पीएम मोदी के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा संभालते हैं। ऐसे में दोनों शक्तियों का साथ आना दुनिया भर के बाजारों में हलचल पैदा करेगा। विशेषकर ऐसे समय में जब अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितताओं ने व्यापारिक बाधाएं खड़ी की हैं, यह समझौता भारत के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
रिफाइनिंग और निर्यात में बढ़ती ताकत पीएम मोदी ने भारत की बढ़ती ऊर्जा क्षमता का भी जिक्र किया। वर्तमान में भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता (260 MMTPA) रखता है और जल्द ही पहले स्थान पर पहुंचने का लक्ष्य है। भारत आज 150 से अधिक देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कर रहा है। यह समझौता यूरोपीय देशों के लिए भारतीय ऊर्जा बाजार में निवेश के नए द्वार खोलेगा।
आम जनता और व्यापारियों को क्या मिलेगा? इस डील के तहत लगभग 90% वस्तुओं पर आयात शुल्क (Import Duty) या तो खत्म कर दिया जाएगा या बहुत कम कर दिया जाएगा। कपड़ा, फुटवियर और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में सीधी और सस्ती पहुंच मिलेगी। वहीं, भारतीय उपभोक्ताओं को यूरोपीय तकनीक और उत्पाद कम कीमतों पर उपलब्ध होंगे। यह करार न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि लोकतंत्र और ‘रूल ऑफ लॉ’ के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।







