ब्रसेल्स में हुई यूरोपीय यूनियन की अहम बैठक ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस बैठक में EU के विदेश मंत्रियों ने मिलकर एक ऐसा फैसला लिया जिसे ऐतिहासिक और असाधारण माना जा रहा है। इस फैसले के तहत ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को औपचारिक रूप से आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया है। इसके बाद IRGC का नाम अब इस्लामिक स्टेट और अल कायदा जैसे कुख्यात संगठनों के साथ उसी सूची में दर्ज हो गया है। यूरोपीय यूनियन का साफ कहना है कि ईरान में आम नागरिकों पर हो रही हिंसा और दमन को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। EU के नेताओं का मानना है कि मानवाधिकारों का उल्लंघन किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार संस्थाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया था।
क्या EU किसी देश की सेना को आतंकी कह सकता है
यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या यूरोपीय यूनियन को यह अधिकार है कि वह किसी देश की आधिकारिक सैन्य इकाई को आतंकी संगठन घोषित कर दे। जवाब है हां। EU के पास अपने कानूनों के तहत यह शक्ति मौजूद है। हालांकि यह फैसला बेहद असाधारण माना जाता है। अब तक बहुत कम उदाहरण देखने को मिले हैं जब किसी संप्रभु देश की सरकारी सैन्य संस्था को आतंकवादी संगठन की श्रेणी में रखा गया हो। यही वजह है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति दोनों के लिहाज से काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। कई विशेषज्ञ इसे वैश्विक राजनीति में एक नई मिसाल के तौर पर देख रहे हैं। वहीं कुछ देशों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ सकता है। बावजूद इसके EU का तर्क है कि कानून और नैतिक जिम्मेदारी के तहत यह फैसला लेना जरूरी था।
IRGC क्या है और क्यों है इतना प्रभावशाली
IRGC की स्थापना 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति के बाद हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा करना था। लेकिन समय के साथ IRGC सिर्फ एक सैन्य बल तक सीमित नहीं रहा। यह ईरान की सुरक्षा नीति अर्थव्यवस्था और रणनीतिक फैसलों का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। माना जाता है कि ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों पर भी IRGC का गहरा नियंत्रण है। इसके अलावा देश के भीतर और बाहर कई सैन्य अभियानों में इसकी भूमिका रही है। यही वजह है कि इसे आतंकी संगठन घोषित किया जाना ईरान के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है। यह फैसला न सिर्फ सैन्य बल्कि राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर भी ईरान को प्रभावित कर सकता है।
कानूनी असर नए प्रतिबंध और बातचीत की संभावना
इस फैसले के बाद यूरोपीय देशों के लिए IRGC से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना कहीं आसान हो जाएगा। अब किसी व्यक्ति के खिलाफ यह साबित करना जरूरी नहीं होगा कि वह सीधे किसी आतंकी हमले में शामिल था। सिर्फ यह दिखाना काफी होगा कि उसका संबंध IRGC से है। इससे संपत्ति जब्त करने केस दर्ज करने और जांच की प्रक्रिया तेज होगी। यूरोप की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान प्रदान भी और मजबूत होगा। इसके साथ ही EU ने ईरान पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप में 15 लोगों और 6 संस्थाओं को निशाने पर लिया गया है जिनमें IRGC के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी संस्थाओं पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है। हालांकि सख्ती के बावजूद EU ने यह साफ किया है कि ईरान से बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होंगे। यूरोप का कहना है कि संवाद जारी रखना भी उतना ही जरूरी है जितना दबाव बनाना।







