बजट 2026 में कितनी मिलेगी योजनाओं को राशि, जानिए वित्त मंत्रालय के चार मुख्य स्तंभ

By: MPLive Team

On: Saturday, January 31, 2026 5:25 PM

बजट 2026 में कितनी मिलेगी योजनाओं को राशि, जानिए वित्त मंत्रालय के चार मुख्य स्तंभ
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देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला केंद्रीय बजट 2026 का शुभारंभ 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। यह उनका लगातार नौंवा बजट होगा। इस बार का बजट वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच पेश किया जा रहा है। ऐसे समय में हर किसी की नजरें बजट पर टिकी हैं कि सरकार किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी और कैसे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बजट की तैयारी केवल जनवरी में ही नहीं बल्कि इसके छह महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के तहत सभी मंत्रालयों को बजट सर्कुलर जारी किया जाता है, जिसमें उन्हें अपनी योजनाओं, खर्चों और नई पहलों का विस्तृत व्यय अनुमान देना होता है।

बजट आवंटन के चार मुख्य स्तंभ

सरकार का बजट आवंटन सिर्फ इसलिए नहीं होता कि कोई मंत्रालय ज्यादा धन की मांग करता है। इसके पीछे एक सटीक प्रक्रिया और चार तकनीकी मानदंड होते हैं। पहला मानदंड पूंजीगत व्यय और राजस्व व्यय के बीच संतुलन का है। सरकार पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देती है क्योंकि यह दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देता है। दूसरा मानदंड वित्तीय वर्ष के लिए नॉमिनल जीडीपी का अनुमान है, जिसमें वास्तविक विकास दर और मुद्रास्फीति दोनों शामिल होते हैं। तीसरा है राजकोषीय घाटे का लक्ष्य, यानी सरकार यह तय करती है कि वह अपनी आय से कितना ज्यादा खर्च कर सकती है, जो आमतौर पर जीडीपी के एक तय प्रतिशत तक सीमित होता है। चौथा मानदंड पिछला प्रदर्शन है। वे योजनाएं जो पिछले आवंटन का सही उपयोग कर चुकी हैं और ठोस परिणाम दिखाती हैं, उन्हें अधिक धन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

बजट का असली गणित और खर्चों का वितरण

एक बार कुल अपेक्षित राजस्व की गणना हो जाने पर सरकार इसे 100 रुपये मानकर खर्च को बांटती है। इसमें से अधिकांश हिस्सा अनिवार्य खर्चों में लॉक होता है। उदाहरण के लिए, ब्याज भुगतान कुल खर्च का लगभग 20% हिस्सा होता है, वहीं राज्यों को सेंट्रल टैक्स में लगभग 22% हिस्सा दिया जाता है। रक्षा क्षेत्र पर लगभग 8% खर्च होता है। सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन भी अधिकतर नॉन नेगोशिएबल खर्च होते हैं। इन सब खर्चों के बाद जो धन बचता है, उसे विकास योजनाओं और सामाजिक कल्याण परियोजनाओं में लगाया जाता है। बजट में आवंटित राशि को सेंट्रल सेक्टर स्कीम और केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं में बांटा जाता है, जहां अक्सर राज्यों के साथ खर्च का 60:40 या 50:50 हिस्सा तय होता है।

बजट फाइनल करने की प्रक्रिया और मंजूरी

बजट को अंतिम रूप देने से पहले वित्त मंत्रालय सभी मंत्रालयों से विस्तार से बातचीत करता है। इसमें अक्सर उनके खर्च की मांगों में कटौती की जाती है ताकि फाइनेंशियल लिमिट के भीतर रहकर बजट बनाया जा सके। इसके बाद फाइनल बजट को प्रधानमंत्री और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी दी जाती है। अंत में यह बजट संसद में अनुदान मांगों के रूप में पेश किया जाता है। संसद के सदन में मतदान के बाद ही सरकार को यह धनराशि खर्च करने की अनुमति मिलती है। इस तरह पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और विकास के नए आयाम खुलते हैं।

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