कल यानी 1 फरवरी को देश का आम बजट 2026-27 पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार लोकसभा में लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट को लेकर चर्चा और उत्सुकता अपने चरम पर है। आज का बजट भले ही डिजिटल युग में पेश किया जाएगा, लेकिन इसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौर से हुई थी। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि भारत का पहला बजट कब और किसने पेश किया था और बजट शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई। बजट की यह कहानी आर्थिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो देश के वित्तीय प्रबंधन के विकास को दर्शाती है।
भारत का पहला बजट आजादी के बाद नहीं बल्कि ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था। 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार में वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने भारत का पहला बजट पेश किया था। जेम्स विल्सन एक स्कॉटिश अर्थशास्त्री थे जिन्होंने ब्रिटिश भारत की आर्थिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए यह कदम उठाया था। वहीं आजादी के बाद भारत का पहला आम बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया, जिसे देश के पहले वित्त मंत्री आर. के शनमुखन चेट्टी ने संसद में रखा था। इसके बाद 28 फरवरी 1948 को पहला वार्षिक बजट पेश किया गया, जिसने देश की वित्तीय नीतियों की नींव रखी।
Budget शब्द फ्रेंच भाषा के शब्द “Bougette” से आया है, जिसका अर्थ होता है छोटा चमड़े का थैला। पुराने समय में यह थैला बहुत काम का माना जाता था क्योंकि लोग इसमें जरूरी दस्तावेज और पैसे रखते थे। ब्रिटेन में जब सरकार देश का हिसाब-किताब संसद में पेश करती थी, तब वित्त मंत्री अपने सारे जरूरी दस्तावेज इस छोटे चमड़े के बैग में लेकर आते थे। इसी बैग को “Bougette” कहा जाता था। धीरे-धीरे इस शब्द का उपयोग सरकार के खर्च और आमदनी की योजना के लिए होने लगा। जब मंत्री बैग खोलकर देश के वित्तीय विवरण बताते थे, तो कहा जाने लगा कि “बजट खोल दिया गया”। यहीं से बजट शब्द की शुरुआत हुई और आज भी यही शब्द विश्वभर में वित्तीय योजना के लिए उपयोग किया जाता है।
कई दशकों तक बजट की तारीख और समय एक नियत परंपरा के तहत तय रहता था। 1999 तक बजट फरवरी के आखिरी कार्यदिवस पर शाम 5 बजे पेश किया जाता था, जो ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसे बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया। तब से बजट का भाषण सुबह से ही शुरू होता है। बजट भाषण की लंबाई भी हमेशा चर्चा का विषय रही है। शब्दों के लिहाज से सबसे लंबा भाषण डॉ. मनमोहन सिंह ने 1991 में दिया था, जिसमें 18,604 शब्द थे। वहीं, समय के लिहाज से सबसे लंबा भाषण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के बजट में दिया था, जो 2 घंटे 42 मिनट तक चला। इसके विपरीत, सबसे छोटा भाषण 1977 में वित्त मंत्री हीरूभाई मूलजीभाई पटेल का था, जो मात्र 800 शब्दों का था।







