पूर्व भारत में बसे राज्य का नाम पश्चिम बंगाल क्यों पड़ा जानिए इसके पीछे का इतिहास

By: MPLive Team

On: Monday, February 2, 2026 5:29 PM

पूर्व भारत में बसे राज्य का नाम पश्चिम बंगाल क्यों पड़ा जानिए इसके पीछे का इतिहास
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भारत के नक्शे को देखते ही एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि जो राज्य देश के बिल्कुल पूर्वी छोर पर स्थित है उसका नाम पश्चिम बंगाल क्यों है। पहली नजर में यह नाम भ्रम पैदा करता है लेकिन इसके पीछे भूगोल से ज्यादा इतिहास और राजनीति की लंबी कहानी छिपी है। पश्चिम बंगाल का नाम किसी दिशा का संकेत नहीं बल्कि सदियों पुराने बंगाल क्षेत्र के विभाजन की पहचान है। यह नाम हमें उस दौर की याद दिलाता है जब बंगाल भारत का सबसे बड़ा और समृद्ध प्रांत हुआ करता था और समय के साथ राजनीतिक फैसलों ने उसकी सीमाएं और पहचान बदल दी।

बंगाल भारत के पूर्व में है फिर पश्चिम शब्द कैसे जुड़ा

आज का पश्चिम बंगाल भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित है लेकिन कभी बंगाल एक विशाल क्षेत्र था। यह क्षेत्र वर्तमान पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और आसपास के इलाकों तक फैला हुआ था। जब बंगाल एक था तब उसके पूर्व और पश्चिम हिस्से स्वाभाविक रूप से पहचाने जाते थे। 1947 से पहले पूरे इलाके को सिर्फ बंगाल कहा जाता था। आज जिस हिस्से को हम पश्चिम बंगाल कहते हैं वह उस पुराने अविभाजित बंगाल का पश्चिमी भाग था। इसी ऐतिहासिक वजह से भारत में बचे बंगाल के हिस्से को पश्चिम बंगाल कहा गया। नाम का यह पश्चिम दिशा से नहीं बल्कि पुराने बंगाल के पश्चिमी हिस्से से जुड़ा है।

बंगाल नाम की उत्पत्ति और प्राचीन इतिहास

बंगाल नाम की जड़ें प्राचीन शब्द वांगा या बंगा से जुड़ी मानी जाती हैं। इतिहासकारों के अनुसार इस क्षेत्र में लगभग चार हजार साल पहले सभ्यताओं के प्रमाण मिलते हैं। यहां द्रविड़, ऑस्ट्रो एशियाई और तिब्बती बर्मन समुदायों का गहरा प्रभाव रहा। समय के साथ यह इलाका व्यापार, संस्कृति और राजनीति का बड़ा केंद्र बना। सिकंदर के समय यहां गंगारिदई नाम का शक्तिशाली साम्राज्य था। मौर्य और गुप्त काल में भी बंगाल समृद्ध रहा। सातवीं सदी में राजा शशांक ने इसे अलग पहचान दी। इसके बाद पाल वंश ने करीब चार सौ वर्षों तक शासन किया। पाल वंश के बाद सेन वंश आया जिसे आगे चलकर दिल्ली सल्तनत ने पराजित कर दिया।

अंग्रेजों से आजादी तक और पश्चिम बंगाल नाम की असली वजह

1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद अंग्रेजों ने बंगाल को अपने शासन का केंद्र बनाया। यह इलाका उस समय भारत का सबसे अमीर प्रांत था। प्रशासनिक सुविधा के लिए अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल का बंटवारा किया लेकिन जबरदस्त विरोध के कारण 1911 में इसे रद्द करना पड़ा। असली विभाजन 1947 में आजादी के समय हुआ। धार्मिक आधार पर बंगाल दो हिस्सों में बंट गया। मुस्लिम बहुल हिस्सा पूर्वी बंगाल कहलाया और पाकिस्तान में शामिल हुआ। हिंदू बहुल पश्चिमी हिस्सा भारत में रहा। चूंकि यह हिस्सा पुराने बंगाल के पश्चिम में स्थित था इसलिए इसका नाम पश्चिम बंगाल रखा गया। बाद में 1971 में पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना लेकिन भारत का यह हिस्सा आज भी पश्चिम बंगाल के नाम से जाना जाता है।

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