मौसम के बदलते हुए ठंडे महीनों में कई महिलाओं को मासिक धर्म के दर्द यानी पीरियड्स के दौरान और अधिक तकलीफ महसूस होती है। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सर्दियों में आपकी पेन, मूड स्विंग्स और बेचैनी बढ़ जाती है? आप अकेली नहीं हैं। वैज्ञानिक शोध और चिकित्सीय अनुभव बताते हैं कि सर्दी के मौसम में महिला शरीर के कामकाज में कुछ बदलाव आते हैं, जो मासिक धर्म के दर्द को बढ़ा सकते हैं। आइए समझते हैं कि क्यों सर्दियों में पीरियड का दर्द बढ़ जाता है और इसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।
सर्दी में मासिक धर्म के दर्द बढ़ने के पीछे की वजहें
डॉ. शिविका गुप्ता, जो एक प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, बताती हैं कि ठंडे मौसम में शरीर अपने तापमान को बनाए रखने के लिए रक्त प्रवाह को सीमित कर देता है। इससे गर्भाशय की मांसपेशियां अधिक सिकुड़ती हैं और दर्द बढ़ता है। इसके अलावा सर्दियों में सूरज की रोशनी कम मिलने से विटामिन डी की कमी हो जाती है, जो सूजन को कम करने और हार्मोन संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। विटामिन डी की कमी से दर्द, थकान और मूड में बदलाव भी तेज हो सकते हैं। सर्दी में दर्द के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है, इसलिए मामूली ऐंठन भी अधिक तीव्र महसूस होती है। इसके साथ ही हार्मोन में बदलाव जैसे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन का असंतुलन मूड स्विंग्स और PMS के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
सर्दियों में मासिक धर्म से जुड़ी परेशानी और उसका असर
सर्दियों में महिलाओं को पेट में सूजन, मिठाइयों की लालसा, अधिक थकावट, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन और व्यायाम की कमी जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। शारीरिक गतिविधि कम होने से रक्त संचार भी प्रभावित होता है, जिससे पीरियड के दर्द में और इजाफा हो सकता है। अगर आपको सर्दियों में ज्यादा क्रैम्प्स, बढ़ा हुआ पेट का दबाव, PMS के लक्षणों में तीव्रता, पीठ दर्द और मूड स्विंग्स महसूस होते हैं, तो यह मौसम से जुड़ा असर हो सकता है।
सर्दी में पीरियड के दर्द को कैसे कम करें?
गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड का इस्तेमाल करें, जिससे मांसपेशियों को आराम मिलता है। हल्का व्यायाम, योगा या पैदल चलना जारी रखें ताकि रक्त संचार बना रहे। विटामिन डी से भरपूर आहार लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सप्लीमेंट्स लेने पर बात करें। गुनगुना पानी और हर्बल चाय पीने से भी आराम मिलेगा। फल, सब्जियां और नट्स जैसे सूजन कम करने वाले आहार को अपने खाने में शामिल करें। तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें। अपने मासिक चक्र और लक्षणों को ट्रैक करें ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह मिल सके।
यदि दर्द बहुत तेज हो, कई दिनों तक जारी रहे, दैनिक कामों में बाधा डाले, अत्यधिक रक्तस्राव हो या घरेलू उपचारों से राहत न मिले, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कुछ गंभीर बीमारियां जैसे एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स या PCOS भी दर्द का कारण हो सकती हैं, जिन्हें समय पर पहचानना और इलाज करवाना जरूरी है।







