भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच वेनेजुएला से तेल आयात की चर्चा, क्या है हकीकत?

By: MPLive Team

On: Wednesday, February 4, 2026 6:05 PM

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच वेनेजुएला से तेल आयात की चर्चा, क्या है हकीकत?
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भारत और अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड डील ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। इसी बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने तेल बाजार में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और वेनेजुएला के साथ व्यापार बढ़ाएगा। हालांकि भारत सरकार ने अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सवाल यह उठता है कि वेनेजुएला से तेल खरीदने से भारत को क्या लाभ हो सकता है और क्या यह रूस के मुकाबले ज्यादा सस्ता या महंगा पड़ेगा। इस रिपोर्ट में हम वेनेजुएला के तेल भंडार, उसकी गुणवत्ता और भारत के लिए इसके फायदे-नुकसान का विश्लेषण करेंगे।

वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार और भारत का वर्तमान आयात स्वरूप

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जिसमें करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का प्रमाणित भंडार मौजूद है। यह वैश्विक तेल भंडार का लगभग 20 फीसदी हिस्सा है। इसके बावजूद वेनेजुएला कभी तेल बाजार में बड़ा खिलाड़ी नहीं बन पाया, जिसकी वजह कमजोर बुनियादी ढांचा और राजनीतिक अस्थिरता मानी जाती है। भारत की तेल जरूरतें बहुत बड़ी हैं, पर वेनेजुएला पर भरोसा सीमित रहा है। 2017-18 में भारत ने वेनेजुएला से करीब 18 हजार मीट्रिक टन तेल खरीदा था, जो 2020-21 तक घटकर सिर्फ 4 हजार मीट्रिक टन रह गया। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2021 से 2023 तक आयात लगभग शून्य के करीब पहुंच गया। इस दौरान भारत ने रूस से सस्ते तेल का आयात बढ़ाया, जिससे उसे बड़ी राहत मिली।

रूस और वेनेजुएला के तेल में अंतर: कीमत, गुणवत्ता और रिफाइनिंग

रूस का तेल यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण बाजार में सस्ता हो गया है, जिससे भारत को इसका लाभ मिला। बाजार भाव के मुकाबले रूसी तेल 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता मिल रहा है। वहीं वेनेजुएला का तेल भारी (हेवी) और उच्च सल्फर वाला होता है, जिसे रिफाइन करना महंगा और जटिल होता है। आम रिफाइनरियां इसे आसानी से नहीं संभाल पातीं, लेकिन भारत की जामनगर और नायरा जैसी उन्नत रिफाइनरियां इस तेल को बेहतर ढंग से प्रोसेस कर सकती हैं। इसलिए, तकनीकी दृष्टि से भारत के पास वेनेजुएला के तेल का बेहतर उपयोग करने की क्षमता है। हालांकि, वेनेजुएला से तेल की शिपिंग और इंश्योरेंस लागत ज्यादा होने से कुल मिलाकर इसकी कीमत रूस की तुलना में अधिक पड़ सकती है।

भारत के लिए रणनीतिक विकल्प: सप्लाई, लागत और वैश्विक बाज़ार

वैश्विक सप्लाई की बात करें तो वेनेजुएला विश्व की कुल तेल सप्लाई का केवल 1 फीसदी हिस्सा है, इसलिए यहां से भारी मात्रा में सप्लाई तुरंत मिलना संभव नहीं। वहीं रूस से तेल की सप्लाई पर अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंधों के कारण उतार-चढ़ाव देखने को मिलते रहे हैं। इसके अलावा भारत ने अमेरिका से भी तेल आयात बढ़ाया है, जो नवंबर 2025 में 27 लाख टन तक पहुंच गया। यह भारत के आयात का 13 फीसदी से अधिक हिस्सा बन चुका है। कुल मिलाकर, वेनेजुएला भारत के लिए रूस के बाद एक वैकल्पिक और रणनीतिक सप्लाई स्रोत हो सकता है। रूस सस्ता और पास का विकल्प है, जबकि वेनेजुएला सस्ता जरूर है, लेकिन दूरी और सप्लाई की अनिश्चितता चुनौती हैं। भारत की बड़ी ताकत उसकी रिफाइनिंग तकनीक है, जिससे वह दुनिया के किसी भी कोने से तेल लेकर अपने उद्योग को मजबूत बना सकता है।

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