पैंक्रियाटिक और लिवर कैंसर में जानलेवा खतरा, जानिए कितनी बचती है 5 साल की जिंदगी

By: MPLive Team

On: Friday, February 13, 2026 3:32 PM

पैंक्रियाटिक और लिवर कैंसर में जानलेवा खतरा, जानिए कितनी बचती है 5 साल की जिंदगी
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कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, जिसमें देर करना जानलेवा साबित हो सकता है। जितनी जल्दी इसे पहचान लिया जाए, रोगी की जान बचाना उतना ही आसान होता है। कैंसर के जोखिम का स्तर इसके स्टेज पर निर्भर करता है। हालांकि, कुछ लोग विशेष प्रकार के कैंसर से अधिक डरते हैं, जैसे कि ब्लड कैंसर, जिसे अधिक खतरनाक माना जाता है। डॉ. नेहा गर्ग (सीनियर कंसल्टेंट और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग प्रमुख, एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल, सोनीपत) के अनुसार, कई प्रकार के कैंसर ऐसे हैं जो तेजी से जानलेवा साबित हो सकते हैं।

सबसे खतरनाक कैंसर कौन सा है?

डॉ. नेहा गर्ग के मुताबिक, कोई एक सबसे खतरनाक कैंसर नहीं है। फिर भी कुछ कैंसर ऐसे हैं, जो मरीज के लिए घातक साबित हो सकते हैं। इनमें पैंक्रियाटिक कैंसर, लिवर कैंसर, स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC) और ग्लियोब्लास्टोमा यानी ब्रेन कैंसर शामिल हैं। ये कैंसर अक्सर जल्दी फैलते हैं और मरीज के जीवन पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। रोगी की स्थिति और कैंसर के प्रकार के आधार पर ही बचाव की संभावना तय होती है।

पांच साल की जीवन रक्षा दर

कैंसर की गंभीरता को समझने के लिए पांच साल की सर्वाइवल रेट देखना महत्वपूर्ण है। पैंक्रियाटिक कैंसर में रोगी के बचने की संभावना 8.3 से 13 प्रतिशत होती है, यानी शुरुआती चरण में केवल 10% मरीज बचाए जा सकते हैं। लिवर कैंसर में औसत जीवन रक्षा दर लगभग 13.4 प्रतिशत है। ग्लियोब्लास्टोमा यानी ब्रेन कैंसर में मरीज का औसत जीवनकाल 12-18 महीने है और सर्वाइवल रेट केवल 12.9 प्रतिशत है। स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC) में मरीज के बचने की संभावना 7% से भी कम होती है। वहीं, इसोफेजियल कैंसर में मरीज के बचने की संभावना लगभग 16.3 प्रतिशत है।

समय पर जांच से बढ़ती है बचाव की संभावना

कैंसर से बचने और लंबे जीवन जीने का सबसे प्रभावी तरीका है समय पर जांच कराना। कैंसर के लक्षणों को पहचानें और अगर किसी प्रकार का संदेह हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। जितनी जल्दी कैंसर का पता चलता है, उतनी जल्दी उपचार शुरू किया जा सकता है और मरीज की बचने की संभावना बढ़ जाती है। परिवार में कैंसर का इतिहास हो तो नियमित जांच और सावधानी बेहद जरूरी है। शुरुआती पहचान और सही उपचार ही मरीज की जिंदगी बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

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