किचन में अक्सर इस्तेमाल होने वाला निगेला सटिवा, जिसे आमतौर पर काला जीरा या मंगरेल कहा जाता है, आकार में छोटा लेकिन गुणों में बड़ा है। आयुर्वेद में इसे रोगों से लड़ने के लिए अत्यंत प्रभावी माना गया है। इसे खाने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। लोग अक्सर इसे आटे के साथ मिलाकर या सीधे खाने में शामिल करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि यह छोटे से बीज कितनी गंभीर बीमारियों को कम करने में मददगार है?
डायबिटीज और वजन नियंत्रण में सहायक
निगेला सटिवा रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को राहत मिलती है। इसके अलावा, निगेला बीज में एंटी-ओबेसिटी गुण पाए जाते हैं। खाली पेट गर्म पानी और शहद के साथ निगेला सेवन करने से अतिरिक्त शरीर की चर्बी कम करने में मदद मिलती है। नियमित सेवन से मेटाबॉलिज्म भी सुधरता है और वजन नियंत्रित रहता है।
हृदय स्वास्थ्य और मस्तिष्क के लिए लाभकारी
काला जीरा खराब कोलेस्ट्रॉल घटाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में मदद करता है। इससे रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदय रोगों का खतरा कम होता है। इसके अलावा, निगेला बीज का सेवन स्मृति और मस्तिष्क की सेहत के लिए भी लाभकारी माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, शहद के साथ निगेला लेने से अल्जाइमर जैसी बीमारियों में भी लाभ मिल सकता है। यह मानसिक ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करता है।
सांस संबंधी रोगों में राहत और अन्य फायदे
निगेला सटिवा में पाया जाने वाला तत्व थाइमोक्विनोन श्वसन मार्ग की सूजन को कम करता है। इसका नियमित सेवन अस्थमा और लंबे समय से चल रहे खांसी में राहत देता है। इसके अलावा, यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है और शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है। छोटे से बीज के इतने सारे लाभ इसे हर किचन का आवश्यक हिस्सा बनाते हैं।







