सफेद तिल का उपयोग आयुर्वेद में सदियों से होता आया है। यह न केवल स्वाद में बेहतरीन होता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। प्राचीन काल में इसे औषधीय रूप से इस्तेमाल किया जाता था। सफेद तिल में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को शक्ति और ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसे रोजाना खाली पेट खाने से कमजोरी, थकान, पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
हड्डियों को मजबूत बनाता है
सफेद तिल में कैल्शियम की मात्रा दूध से भी अधिक होती है। इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भी मौजूद होते हैं, जो हड्डियों की मजबूती बढ़ाने में मदद करते हैं। यह संयुक्त दर्द और जोड़ों की कमजोरी को कम करने में भी सहायक है। विशेष रूप से बुजुर्गों और हड्डियों से जुड़ी परेशानियों वाले लोगों के लिए सफेद तिल का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है। रोजाना तिल खाने से हड्डियों की घनता बढ़ती है और शरीर में लचीलापन भी आता है।
हृदय स्वास्थ्य और पाचन में सहायक
सफेद तिल में सेसमिन और सेसमोलिन नामक यौगिक पाए जाते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित रखते हैं और धमनियों को स्वस्थ बनाए रखते हैं। इसके अलावा तिल में भरपूर फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। सुबह खाली पेट तिल खाने से मेटाबॉलिज़्म बेहतर होता है और कब्ज जैसी पुरानी समस्याओं में राहत मिलती है। यह हृदय और पाचन दोनों के लिए लाभकारी आहार माना जाता है।
चमकती त्वचा और मजबूत बाल
सफेद तिल में जिंक और विटामिन E पाए जाते हैं, जो शरीर में कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देते हैं। कोलेजन त्वचा की चमक और लोच के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा तिल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण बालों को झड़ने और समय से पहले सफेद होने से रोकते हैं। नियमित सेवन से त्वचा में निखार आता है और बाल भी स्वस्थ, घने और मजबूत बनते हैं। यह छोटी सी दाना स्वास्थ्य और सुंदरता दोनों के लिए वरदान साबित हो सकता है।







