जबलपुर-भोपाल हाईवे पर लाल पट्टियों से वन्यजीवों और इंसानों की सुरक्षा बढ़ाई गई

By: MPLive Team

On: Friday, February 27, 2026 3:19 PM

जबलपुर-भोपाल हाईवे पर लाल पट्टियों से वन्यजीवों और इंसानों की सुरक्षा बढ़ाई गई
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मध्य प्रदेश के जबलपुर-भोपाल हाईवे (NH-45) पर सफर करने वाले यात्री इन दिनों एक अनोखे नजारे के गवाह बन रहे हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने देश में पहली बार एक ऐसी सड़क तैयार की है जिसमें हाईवे के बीचों-बीच चमकदार लाल पट्टियां बिछाई गई हैं। यह सिर्फ सड़क का डिज़ाइन नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक और सुरक्षा पर आधारित पहल है। इसके पीछे मकसद हाई-रिस्क ज़ोन में ड्राइवरों की सतर्कता बढ़ाना और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ब्राइट रेड टेबल-टॉप मार्किंग तकनीक

जबलपुर-भोपाल हाईवे का एक बड़ा हिस्सा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से होकर गुजरता है। इस हाई-रिस्क कॉरिडोर में अक्सर जंगली जानवर सड़क पार करते समय तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते थे। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए NHAI ने ब्राइट रेड टेबल-टॉप मार्किंग तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह तकनीक सड़क की सतह पर उभरी हुई लाल पट्टियां बनाकर ड्राइवरों को चेतावनी देती है। जैसे ही वाहन इन लाल पट्टियों के ऊपर से गुजरता है, टायर और सड़क के घर्षण से एक खास कंपन और आवाज पैदा होती है, जिससे ड्राइवर तुरंत ब्रेक लगाने के लिए सतर्क हो जाता है।

रात के अंधेरे में सुरक्षा कवच

हाईवे पर सबसे ज्यादा हादसे रात के समय होते हैं, जब विजिबिलिटी कम होती है। घने जंगलों के बीच जंगली जानवर अचानक सड़क पर आ जाते हैं और हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ये लाल टेबल-टॉप मार्किंग्स रात के वक्त हेडलाइट की रोशनी में चमकती हैं, जिससे ड्राइवरों को पहले ही पता चल जाता है कि वह एक एनिमल क्रॉसिंग जोन में प्रवेश कर रहा है। इसका सीधा असर यह होता है कि वाहन की रफ्तार कम होती है और जंगली जानवर सुरक्षित रूप से सड़क पार कर पाते हैं।

वन्यजीवों और इंसानों की सुरक्षा

NHAI की यह पहल इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे बाघ, तेंदुआ, हिरण जैसे दुर्लभ वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे। साथ ही, सड़क हादसों में इंसानी जान भी बचाई जा सकेगी। इस तकनीक से ड्राइवरों की सतर्कता बढ़ती है और हाई-रिस्क कॉरिडोर में गाड़ियों की गति नियंत्रित होती है। इसे देश में एक उदाहरण माना जा रहा है और अन्य राज्यों के हाईवे भी जल्द इस तकनीक को अपनाने की योजना बना रहे हैं।

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