मिडिल ईस्ट में हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर सीधे दिखाई दे रहा है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमत लगभग 12 प्रतिशत बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई मार्गों में से एक है और यहां किसी भी रुकावट का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जाएगा। तेल संकट की आशंका बढ़ने से भारत समेत अन्य देशों की आर्थिक गतिविधियों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
भारत का तेल भंडार और आपातकालीन स्थिति
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के पास फिलहाल लगभग 10 दिनों की तेल मांग को पूरा करने का पर्याप्त कच्चा तेल भंडार है। यह स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व अचानक आने वाली रुकावटों की स्थिति में अस्थायी राहत प्रदान करता है। हालांकि यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश को इंपोर्ट के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ना पड़ेगा। इसके लिए भारत रूस या अन्य देशों से अतिरिक्त तेल खरीदने पर विचार कर सकता है। यह रणनीति कुछ समय के लिए राहत तो देगी, लेकिन दीर्घकालिक संकट के लिए पर्याप्त नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता
भारत हर दिन लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट के जरिए इंपोर्ट करता है। यह तेल ज्यादातर इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से आता है। इसके अलावा भारत अपनी घरेलू एलपीजी सप्लाई का 90 से 100 प्रतिशत और एलएनजी इंपोर्ट का लगभग 60 प्रतिशत इसी मार्ग पर निर्भर करता है। इसलिए इस जलमार्ग में किसी भी तरह की रुकावट ना सिर्फ ईंधन की कीमतों पर असर डालेगी, बल्कि घरेलू रसोई गैस और औद्योगिक ऊर्जा की आपूर्ति पर भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
वैश्विक तेल कीमतों और भारत पर असर
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। अगर यह मार्ग बंद हो जाता है, तो ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत इंपोर्ट करता है। इससे सप्लाई में रुकावट होने पर देश में ट्रांसपोर्टेशन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार क्रूड ऑयल की कीमत में $1 की बढ़ोतरी भारत के सालाना इंपोर्ट बिल में लगभग 2 मिलियन डॉलर जोड़ सकती है। ऐसे में भारत की आर्थिक स्थिति और घरेलू बाजार पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।







