ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इतिहास में अमेरिकी दखल को फिर से उजागर किया

By: MPLive Team

On: Friday, March 6, 2026 6:08 PM

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इतिहास में अमेरिकी दखल को फिर से उजागर किया
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यूनाइटेड स्टेट्स, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के मिलिट्री दखल का इतिहास फिर से चर्चा में है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह के सैन्य ऑपरेशन किए हैं। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि अमेरिका ने अब तक 400 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में दखल दिया। इन ऑपरेशनों में सीधे युद्ध, हवाई हमले, नेवी के झगड़े, साथियों को मिलिट्री सपोर्ट और गुप्त ऑपरेशन शामिल हैं। अमेरिका की यह सक्रियता उसे वैश्विक राजनीति और युद्धों में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करती है।

सबसे ज्यादा प्रभावित देश और युद्धों के परिणाम

अमेरिका के मिलिट्री दखल से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में वियतनाम, इराक, अफगानिस्तान और लाओस शामिल हैं। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका ने इतने बम गिराए कि यह द्वितीय विश्व युद्ध की तुलना में अधिक था। लाओस को बाद में इतिहास में सबसे ज्यादा बमबारी वाले देशों में गिना गया। 21वीं सदी में आतंक के खिलाफ युद्ध के तहत अफगानिस्तान और इराक में हुए संघर्षों ने स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करना पड़ा, आर्थिक गिरावट हुई और सामान्य नागरिकों की भारी संख्या में मौतें हुईं।

राजनीतिक दखल और शासन में बदलाव

सिर्फ मिलिट्री ऑपरेशन ही नहीं, अमेरिका पर कई देशों में राजनीतिक दखल देने और शासन बदलने के आरोप भी लगते रहे हैं। ईरान में 1953 का तख्तापलट इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है, जब सीआईए ने प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग को हटाने में मदद की थी। इसी तरह 1973 में चिली में सल्वाडोर अलेंदे की सरकार गिराने के आरोप लगे। 2011 में लीबिया में मिलिट्री दखल मुअम्मर गद्दाफी के पतन में मददगार साबित हुआ। इन घटनाओं ने अमेरिका के विदेश नीति और सैन्य हस्तक्षेप के पैटर्न को दर्शाया है।

ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य और राजनीतिक तनाव

ईरान अमेरिका के दखल का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण है। 1953 के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे। 1988 में ऑपरेशन प्रेइंग मेंटिस के दौरान फारस की खाड़ी में सीधी मिलिट्री लड़ाई हुई। 2025-2026 में भी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ चुका है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरानी मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर हमलों की खबरें सामने आईं। यह दर्शाता है कि अमेरिका का ग्लोबल मिलिट्री दखल केवल इतिहास नहीं बल्कि वर्तमान में भी दुनिया की राजनीति और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है।

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