मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल को होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग को लेकर चेतावनी दी है। हालांकि ईरान ने कहा कि स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों पर रोक लग सकती है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी ऊर्जा मार्गों में से एक है, जो तेल और गैस के निरंतर प्रवाह के लिए बेहद अहम माना जाता है।
फारस की खाड़ी: दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन
फारस की खाड़ी क्षेत्र, जिसमें सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर शामिल हैं, दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा हब माना जाता है। यहां के बड़े प्रूवन तेल और नेचुरल गैस रिजर्व अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाने से पहले इसी इलाके से गुजरते हैं। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक पतला जलमार्ग है। ग्लोबल एनर्जी डेटा के मुताबिक, दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति और 20% एलएनजी शिपमेंट इसी स्ट्रेट से होकर गुजरती है।
एशियाई देशों को सबसे ज्यादा सप्लाई
फारस की खाड़ी से ज्यादातर ऊर्जा निर्यात एशियाई देशों को भेजा जाता है। ये देश अपनी इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के लिए इम्पोर्टेड तेल और गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला लगभग 84% कच्चा तेल और 83% एलएनजी एशियाई देशों को डिलीवर किया जाता है। चीन इस क्षेत्र का सबसे बड़ा आयातक है, जबकि भारत भी अपनी तेल और एलएनजी जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। जापान और दक्षिण कोरिया भी खाड़ी की ऊर्जा आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर हैं।
भारत की ऊर्जा निर्भरता
भारत की आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा खपत तेजी से बढ़ी है, जिससे देश इंपोर्टेड ईंधन पर काफी हद तक निर्भर हो गया है। भारत अपनी क्रूड ऑयल की जरूरतों का लगभग 75% से 90% दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है, जिसमें 50% से 55% तेल फारस की खाड़ी, खासकर इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आता है। इसके अलावा, भारत की एलपीजी की लगभग 80% से 85% मांग इंपोर्ट से पूरी होती है, जिसमें 85% से अधिक सीधे खाड़ी देशों से आता है। इसलिए खाड़ी क्षेत्र में कोई भी रुकावट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है।







