महिला दिवस पर जानिए हर दशक में महिलाओं के लिए कौन-कौन सी जांच अनिवार्य

By: MPLive Team

On: Sunday, March 8, 2026 1:00 PM

महिला दिवस पर जानिए हर दशक में महिलाओं के लिए कौन-कौन सी जांच अनिवार्य
Google News
Follow Us
---Advertisement---

अच्छे स्वास्थ्य के लिए महिलाओं के लिए समय-समय पर अपनी सेहत की जांच कराना बेहद जरूरी है। परिवार की जिम्मेदारियों में कई बार महिलाएं अपनी सेहत की अनदेखी कर देती हैं। 20 से 60 साल की उम्र के बीच महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं जन्म ले सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर आवश्यक जांच करवा लेने से गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक चरण में पता लगाया जा सकता है। इसलिए महिला दिवस के अवसर पर जानना जरूरी है कि 20 से 60 साल की महिलाओं के लिए कौन-कौन सी स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हैं।

20 और 30 की उम्र में जरूरी स्वास्थ्य जांच

20 के दशक में महिलाओं को विशेष रूप से गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और यौन संचारित रोगों की जांच करानी चाहिए। पैप स्मियर टेस्ट से प्रारंभिक स्तर पर गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा एचपीवी वैक्सीनेशन, सामान्य रक्त जांच, हीमोग्लोबिन और शुगर लेवल की जांच, थायरॉइड टेस्ट और मासिक स्तन स्वयं जांच बेहद जरूरी हैं। 30 के दशक में प्रजनन स्वास्थ्य और मेटाबॉलिक समस्याओं की जांच बढ़ जाती है। इस उम्र में महिलाओं को नियमित रूप से पैप स्मियर और एचपीवी टेस्ट, क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन, शुरुआती मैमोग्राफी, शुगर और डायबिटीज स्क्रिनिंग, कोलेस्ट्रॉल और विटामिन जांच करानी चाहिए।

40 और 50 के दशक में स्वास्थ्य परीक्षण

40 के दशक में कैंसर की जांच और प्रीमेनोपॉज़ल बदलावों की निगरानी शुरू करनी चाहिए। इस उम्र में महिलाओं को सालाना मैमोग्राफी, रक्तचाप, शुगर, लिपिड प्रोफाइल, थायरॉइड टेस्ट और हार्मोनल जांच करानी चाहिए। जिन महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम है, उन्हें बोन डेंसिटी टेस्ट भी कराना जरूरी है। 50 के दशक में महिलाओं का ध्यान हड्डियों, हृदय और कैंसर से संबंधित जांचों पर होना चाहिए। बोन मिनरल डेंसिटी, नियमित मैमोग्राफी, कोलोन कैंसर स्क्रीनिंग, कार्डियक रिस्क असेसमेंट और मेनोपॉज़ संबंधी लक्षणों की जांच अहम हैं।

60 साल की उम्र और आगे की सावधानियां

60 साल की उम्र में महिलाओं का फोकस दीर्घकालीन स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने पर होना चाहिए। इस उम्र में नियमित रूप से स्तन कैंसर स्क्रीनिंग, हड्डियों की जांच, हृदय संबंधी मूल्यांकन, पेल्विक परीक्षा, किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट, और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आकलन जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज़ के बाद होने वाले असामान्य रक्तस्राव, पेट में सूजन या अन्य लक्षणों की अनदेखी न करें। समय पर जांच से महिलाएं गंभीर बीमारियों जैसे स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, ऑस्टियोपोरोसिस और हृदय रोगों का प्रारंभिक चरण में पता लगा सकती हैं और उन्हें प्रभावी इलाज मिल सकता है।

For Feedback - devendra.abpnews@gmail.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment