पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच सैन्य तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर पड़ रहा है, जो केवल 30 मील चौड़ा है और दुनिया के ऊर्जा परिवहन के लिए बेहद अहम है। यदि यह मार्ग केवल 30 दिनों के लिए भी बंद हो जाए, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उत्पन्न संकट का असर दशकों तक महसूस किया जा सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल और आपूर्ति का संकट
हॉर्मुज मार्ग बंद होने का सबसे पहला और प्रत्यक्ष असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। वर्तमान में तेल की कीमत जो भी हो, मार्ग बंद होते ही यह 150 डॉलर से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इससे न केवल परिवहन महंगा होगा, बल्कि उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल इस मार्ग से गुजरता है, जो दुनिया की कुल तेल खपत का पांचवां हिस्सा है। यदि यह प्रवाह 30 दिनों तक रुके, तो वैश्विक औद्योगिक गतिविधियां ठप होने की कगार पर पहुँच जाएंगी।
भारत और एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 40-50 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज मार्ग से मंगवाता है। यदि मार्ग बंद रहता है, तो पेट्रोल और डीज़ल की भारी किल्लत उत्पन्न होगी। इसके अलावा, माल ढुलाई प्रभावित होगी और फल, सब्जी, अनाज जैसी बुनियादी वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी एशियाई अर्थव्यवस्थाएं भी इस संकट से गहराई तक प्रभावित होंगी। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा और निवेशकों का भरोसा कमजोर होगा।
वैकल्पिक मार्ग सीमित और सैन्य टकराव का खतरा
सऊदी अरब और यूएई में कुछ पाइपलाइन विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनकी क्षमता हॉर्मुज से गुजरने वाले तेल के विशाल टैंकरों को संभालने के लिए अपर्याप्त है। यदि ईरान मार्ग को भौतिक रूप से बंद करता है, तो दुनिया के पास कोई त्वरित विकल्प नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 30 दिनों का बंद वैश्विक मंदी और आर्थिक महाविनाश की स्थिति पैदा कर सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और सहयोगी देशों द्वारा सैन्य प्रतिक्रिया की संभावना भी बढ़ जाती है। कुल मिलाकर, हॉर्मुज का नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक संतुलन की कुंजी बन चुका है।







