वर्तन निदेशालय (ED) ने IPAC के स्थानों पर रेड की है। पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी के मामले में ये छापेमारी हुई है। दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में रेड हो रहा है। ऋषिराज सिंह के स्थानों पर छापेमारी हुई है। कंपनी के को-फाउंडर ऋषिराज सिंह हैं।
PAC एक राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है। इसी साल जनवरी में IPAC के स्थानों पर भी जांच एजेंसी ने छापेमारी की थी। रेड पर कंपनी ने एक बयान में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने हमारे डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और कोलकाता में IPAC के कार्यालय पर तलाशी ली। IPAC जैसे पेशेवर संगठन के लिए यह एक दुर्भाग्यपूर्ण और कठिन दिन था।
कम्पनी ने कहा कि हमारा मानना है कि इससे गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं और एक चिंताजनक उदाहरण बनता है। इसके बावजूद, हमने पूरा सहयोग दिया है और ऐसा करने के लिए आगे भी करेंगे। हम कानून का पूरा सम्मान करते हुए इस प्रक्रिया में शामिल होंगे।
IPAC ने पेशेवर सलाहकार के रूप में कई राजनीतिक पार्टियों के साथ काम किया है, जो अलग-अलग विचारधारा और क्षेत्रों से आते हैं, जैसे भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, YSR कांग्रेस पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब BRS), जनता दल (यूनाइटेड), शिवसेना और अन्य।
बाद में ED की रेड पर काफी राजनीतिक बहस हुई। ED ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान दखल दिया, पुलिस की मदद से डिजिटल डिवाइस और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ हटा दिए और अधिकारियों को बिना किसी ज़ब्त किए ही तलाशी रोकने को मजबूर किया।
उसने यह भी दावा किया कि IPAC को लगभग 20 करोड़ रुपये का हवाला फंड कथित कोयला चोरी से भेजा गया था और उसने अदालत से सुरक्षा की मांग की है, जिसमें ज़ब्त किए गए डेटा से बचाव और उसके अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से बचाव शामिल है।







