सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर आपत्तिजनक कार्टून बनाने को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इसे ‘अपरिपक्व’ और ‘उकसाने वाला’ करार दिया है। न्यायमूर्ति सुधांशु धौलिया और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए हेमंत के इस कार्टून पर असंतोष जताया।
हेमंत के पक्ष में वकील वृंदा ग्रोवर ने दी दलील
हेमंत के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में वकील वृंदा ग्रोवर ने तर्क दिया कि हेमंत ने वह कार्टून हटा दिया है और उन्होंने यह भी बयान दिया है कि वह आपत्तिजनक टिप्पणियों का समर्थन नहीं करते। वृंदा ने माना कि हेमंत का कार्टून खराब था और कई लोगों को पसंद नहीं आया, लेकिन इसे अपराध नहीं कहा जा सकता। साथ ही, उन्होंने interim सुरक्षा की मांग भी की क्योंकि पुलिस बार-बार उनके दरवाजे पर आ रही है।
न्यायालय ने पूछा हेमंत की उम्र, कही ‘परिपक्व नहीं’
सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत की उम्र पूछी तो वकील वृंदा ने बताया कि वे 50 वर्ष के हैं। इस पर न्यायाधीश सुधांशु धौलिया ने कहा, “इतनी उम्र होने के बावजूद वे परिपक्व नहीं हैं। हम मानते हैं कि यह (कार्टून) उकसाने वाला था।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है।
हाई कोर्ट ने पहले ही किया था जमानत खारिज
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 3 जुलाई को हेमंत की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि हेमंत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है और उनके कार्टून पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हेमंत ने बताया कि यह कार्टून उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान बनाया था, जब पूरे देश में भय का माहौल था। अब सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे फिर से शेयर कर सरकार की आलोचना कर रहे हैं।







