Singrauli News: मध्यप्रदेश के उर्जाधानी सिंगरौली जिले के एक दलदल भरे रास्ते की बदहाल तस्वीर सामने आई है। इस मार्ग में पग-पग पर दो से तीन फिट के गड्ढे और गड्डो में पानी, कीचड़ से सनी यह सड़क न सिर्फ आवागमन में बाधित बन रही है बल्कि लोगों के जीवन के लिए भी खतरा बन गई है।यह हाल उस इलाके की है जहाँ पर पावर प्लांट स्थापित है, पावर प्लांट के 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित यह मार्ग बदहाल है, जबकि इसी मार्ग से रोजाना सैकङो लोग पावर प्लांट में जाते है।
स्कूली बच्चे रोजाना नंगे पैर निकलते है, क्योंकि कीचड़ में धंसकर या तो चप्पल जूते टूटेंगे या बच्चे गिरेंगे। गाँव के पहुँचने का एकमात्र रास्ता भी यही है। बारिश में लोग बेहद परेशान हो जाते है। इस मार्ग की हालत इतनी खराब है कि इस मार्ग से वाहन से जाने के बारे में सोचना ही बेमानी है।
करसुआ लाल की सड़क आज भी बदहाल
सिंगरौली जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित करसुआ लाल की सड़क आज भी अपने बदहाली पर आसूं बहा रही है। आजादी के कई दशक बाद भी 2 किलोमीटर की यह सड़क पक्की नही बन पाई। इसी सड़क से रोजाना सैकङो लोगों का आवागमन होता है। कीचड़ व घुटने तक पानी में होकर छात्राएं, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग महिलाएं व कर्मचारी रोजाना गुजरने को विवश हैं। कई बार ग्रामीणों ने इस मार्ग को पक्की सड़क बनवाने की गुहार कलेक्टर तक लगा चुके है लेकिन नतीजा सिफर रहा।
ये है उर्जाधानी सिंगरौली की डगर: पग-पग पर गड्ढे, गड्ढों में पानी, इस कीचड़ से लबालब रोड की यही कहानी @CollectorSGL @singrauli_sp #singrauli #singraulipolice #MadhyaPradesh #madhyapradeshnews pic.twitter.com/IRtaZ5ByQe
— Hindi News (@Newsmplive_25) July 15, 2025
बदहाल सड़क में फंसी थानेदार की गाड़ी को ग्रामीणों ने धक्का लगाकर निकाली
इसी मार्ग से बंधौरा चौकी के दरोगा गुजर रहे थे उसी दौरान उनकी सरकारी गाड़ी कीचड़ में फंस गई। जिसे ग्रामीणों ने धक्का देकर निकालने का प्रयास किया लेकिन नही निकल पाई.इसके बाद उसे ट्रैक्टर से निकाला गया। यह हाल रोजाना किसी न किसी गाड़ी का होता है। क्योंकि बारिश का मौसम है। इलाके में रोजाना बारिस हो रही है। ऐसे में इस मार्ग में गाड़ी की रप्तार पर ब्रेक लगना कोई बड़ी बात नही है।

जीवन और मौत के बीच सड़क
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी घर में महिला गर्भवती हो और डिलीवरी का समय आ जाए या फिर किसी बीमार को अस्पताल पहुंचना किसी संघर्ष से कम नहीं है। कई बार ट्रैक्टर से खींचकर एंबुलेंस को गांव तक लाया जाता है। किसी की मौत होने पर शवयात्रा को उसी कीचड़ और दलदल से होकर निकलना पड़ता है। छात्र-छात्राएं रोज़ इसी रास्ते से करसुआ राजा या अन्य स्थानों पर स्कूल जाते हैं। गंदगी और दलदल भरे रास्ते से गुजरना उनके लिए रोज का संघर्ष बन गया है।

यह वही जिला है जो मध्यप्रदेश सरकार को इंदौर के बाद दूसरे नंबर पर सबसे अधिक राजस्व देता है। यहाँ की प्रचुर खनिज संपदाओं की वजह से काले हीरे की खान, सोने की खान बिजली का गढ़ है। यह इलाका लेकिन इसके बावजूद इस इलाके की तस्वीर बदहाल है। यदि जिले के गांवों की ऐसी हालत है तो यह सरकार और सिस्टम दोनों की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल है।








