राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सीआरआईएसपी (CRISP) को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों की रोज़गार मांग का आकलन करना चाहिए और उसी के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करने चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि स्थानीय उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार स्थानीय छात्रों को प्रशिक्षित किया जाए, ताकि वे अपने ही क्षेत्र में रोज़गार पा सकें। यह बात उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में सीआरआईएसपी के 29वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, आयुष और तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद रहे। राज्यपाल ने ‘सक्षम योजना’ के तहत महिला प्रशिक्षुओं और ‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना’ के तहत प्रशिक्षित युवाओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए और प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षुओं की सराहना की।
आत्मनिर्भर भारत और ‘फोर लेन मॉडल’ की चर्चा
राज्यपाल पटेल ने कहा कि सीआरआईएसपी ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का नया मार्ग दिखाया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प की दिशा में सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज देश ‘स्किल इंडिया’ और ‘स्किल्ड इंडिया’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। राज्यपाल ने ‘फोर लेन मॉडल’—विकेंद्रीकरण, स्वदेशी, उद्यमिता और सहयोग—को रोज़गार के अवसर बढ़ाने में प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि देश में आज भी कृषि सबसे अधिक रोज़गार देने वाला क्षेत्र है, जिसमें लगभग 35% युवा जुड़े हैं, जबकि करीब 11 करोड़ लोग लघु और कुटीर उद्योगों के माध्यम से स्वरोज़गार अपना चुके हैं।

सीआरआईएसपी केंद्रों का विस्तार, उज्जैन से होगी शुरुआत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि राज्य में औद्योगिक और निवेश गतिविधियों के विस्तार के कारण कुशल श्रमिकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस आवश्यकता को देखते हुए सीआरआईएसपी केंद्रों का विस्तार संभाग स्तर तक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अगस्त को बड़नावर-धार में “पीएम मित्र पार्क” के भूमि पूजन में शामिल होंगे, जिसके बाद इस क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की मांग और बढ़ेगी। इसी वजह से सीआरआईएसपी का पहला संभागीय केंद्र उज्जैन में स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल राज्य के युवाओं को रोज़गारोन्मुख कार्यों से जोड़कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी और देश-प्रदेश की प्रगति में योगदान देगी।
सीआरआईएसपी की उपलब्धियां और भविष्य की दिशा
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सीआरआईएसपी राज्य का एक प्रतिष्ठित कौशल विकास केंद्र है और बदलते समय के साथ इसे नए पाठ्यक्रम शुरू करने चाहिए। कार्यक्रम में सीआरआईएसपी ने बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। सीआरआईएसपी के प्रबंध निदेशक डॉ. कांत पाटिल ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए संस्थान के कार्यों, उद्देश्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी, जबकि निदेशक अमोल वैद्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया। 1997 में भारत-जर्मन तकनीकी सहयोग समझौते के तहत स्थापित यह संस्थान अब तक लगभग 1.5 लाख विद्यार्थियों, 1500 प्रशिक्षकों और 10,000 से अधिक सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे चुका है। कौशल विकास, औद्योगिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा में सीआरआईएसपी की भूमिका निरंतर बढ़ती जा रही है।







