सुलियारी खदान क्षेत्र में हरित क्रांति: अब तक 1.63 लाख पौधारोपण, अगले 3 वर्षों में 3 लाख का लक्ष्य

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सिंगरौली, 18 अगस्त 2025: देश की ऊर्जाधानी सिंगरौली मे सुलियरी एक आदर्श खदान के तौर पर देखा जा रहा है और उसी तरह धिरौली खदान में जिम्मेदार खनन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। खदान क्षेत्र में अब तक कुल 1,63,197 पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि इस वर्ष 1 लाख 20 हजार से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

3 लाख से ज्यादा पौधारोपण का लक्ष्य

आने वाले तीन वर्षों में 3 लाख से ज्यादा पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे क्षेत्र को हरित और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस प्रयास हो रहे हैं। धिरौली खनन परियोजनाको भी जनता ने खूब समर्थन दिया है। सुलियरीमे खनन के बाद जमीन को पुनः उपयोगी बनाने की प्रक्रिया के तहत 52 एकड़ भूमि को पौधरोपण के लिए विकसित किया गया है।

25 एकड़ में उच्च-प्रौद्योगिकी नर्सरी

साथ ही, 25 एकड़ भूमि पर उच्च-प्रौद्योगिकी नर्सरी तैयार की गई है, जिसमें महुआ, खैर, बरगद, नीम, अर्जुन, साल, हर्रा और बहेरा जैसे वृक्षों की विविध प्रजातियां पाली जा रही हैं। लगाए गए वृक्षों में नीम, अमलतास, महुआ, जामुन, आम, अर्जुन और साल प्रमुख हैं। इन पौधों का औषधीय, पारिस्थितिक और सामाजिक महत्व है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र को और अधिक हरित बनाएंगे।

युवाओं को बागवानी में प्रशिक्षित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्थानीय युवाओं को बागवानी में प्रशिक्षित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिल रहा है, बल्कि स्थानीय समुदाय की आजीविका भी सुदृढ़ हो रही है।

पर्यावरण के महत्व को समाज तक पहुँचाने के लिए आसपास के गांव स्थित विद्यालयों में ड्राइंग प्रतियोगिता और महिलाओं के लिए रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण, वनों के महत्व और वन्यजीव संरक्षण जैसे संदेश प्रसारित किए जाते हैं।

पिछले कुछ महीनों में ग्रामीण क्षेत्रों में कई जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इनका उद्देश्य लोगों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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