कचरे के ‘ढेर’ में फैला हुआ सिस्टम; करोङो खर्च के बाद भी नही बदली शहर की सूरत, नगर निगम के सरकारी खजाने को साफ कर रहा ठेकेदार

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सिंगरौली।। दुनिया के नक्शे पर अपनी पहचान बना चुका एमपी का सिंगरौली जिला भले ही हर साल कूड़ा (Garbage) उठाने के लिए करीब 18 करोड़ रुपये खर्च करता हो, लेकिन यहां कभी भी सड़क किनारे कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। आलम यह है कि शहर के कूड़े को उठाकर शहर के अंदर ही सड़को के किनारे व नदी ,नाले में डंप किया जा रहा है, जिससे सड़को पर चलना मुश्किल हो गया है। केवल सिंगरौली नगर निगम क्षेत्र की साफ सफाई पर नगर निगम के द्वारा हर साल करीब 18 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाती है। उसके बाद भी शहर के हालात नहीं बदल रहे हैं।

वैसे तो सिंगरौली नगर निगम ने शहर को साफ व स्वच्छ रखने के लिए सिटाडेल ISWM प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौपीं है। वर्ष 2018 में नगर निगम सिंगरौली और सिटाडेल कंपनी के बीच शहर के कुल 45 वार्डो में कचरा संकलन एवं प्रबंधन के कार्य करने लिए अनुबंध किया गया है। जिसका भुगतान नगर निगम प्रतिमाह करीब डेढ़ करोङ रुपये करती है। लेकिन उसके बावजूद शहर की गंदगी साफ नही हुआ। यह जरूर है कि नगर निगम का सरकारी खजाना साफ हो रहा है।

सिंगरौली नगर निगम सफाई घोटाला: करोड़ों खर्च के बाद भी कचरे का अंबार

कैसे होता है घोटाला

सिंगरौली नगर निगम में 45 वार्ड हैं। जिनमें वार्ड 34 व 35 वार्ड भी शामिल है, ये दोनों वार्ड पहले से ही एनटीपीसी परियोजना क्षेत्र में आते है, जहाँ साफ सफाई की जिम्मेदारी एनटीपीसी की है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाली सिटाड़ेल कंपनी ने नगर निगम से भी सफाई के नाम पर भुगतान ले रही है और एनटीपीसी से भी, यानी डबल गेम, एक काम दो भुगतान.

सिंगरौली नगर निगम सफाई घोटाला: करोड़ों खर्च के बाद भी कचरे का अंबार

भ्रष्टाचार में सभी शामिल

बताया जाता है कि इस भ्रष्टाचार में सभी शामिल हैं। 2018 में रजिस्टर्ड हुई नवजात कंपनी को नगर निगम ने बिना किसी अनुभव के आधार पर कचरा संकलन और प्रबंधन का काम 20 वर्षो के लिए सिटाडेल कंपनी को दे दिया। इतना ही नही नगर निगम सिंगरौली ने यह जानते हुए की वार्ड क्रमांक 34 व 35 एनटीपीसी परियोजना विन्ध्यनगर के क्षेत्र में आते है।

जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी एनटीपीसी की है लेकिन उसके बावजूद साफ सफाई व कचरा संकलन के लिए नगर निगम ने कंपनी के अनुबंध में शामिल कर दिया। उधर एनटीपीसी ने भी उसी कंपनी को साफ सफाई के लिए ठेका दे दिया। मजे की बात यह है कि ठेकेदार को नगर निगम और एनटीपीसी के द्वारा साफ सफाई व डोर टू डोर कचरा संकलन के लिए भुगतान किया जा रहा है। यह खेल सब की मिलीभगत के बिना कैसे संभव हो सकता है?

सिंगरौली नगर निगम सफाई घोटाला: करोड़ों खर्च के बाद भी कचरे का अंबार

EOW तक पहुँच गई इस घोटालें की आंच

जैसे ही इस घोटाले की जानकारी EOW को लगी। EOW की टीम ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। फिलहाल EOW की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पायेगा की इस घोटालें के खेल में कौन कौन अधिकारी कर्मचारी शामिल है।

सिंगरौली नगर निगम सफाई घोटाला: करोड़ों खर्च के बाद भी कचरे का अंबार

क्या कहते है नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी

इस मामले में नगर निगम सिंगरौली के सहायक आयुक्त रुपाली द्विवेदी ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में आया है, जांच कराएंगे।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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