मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की असलियत उजागर कर दी है। एक गर्भवती महिला को उसका पति ठेले पर अस्पताल लाया। अस्पताल में डॉक्टर न होने की वजह से वहाँ के कर्मचारियों ने उसे रात 8:00 बजे घर वापस आने को कहा। फिर पति उसी ठेले पर घर लौट आया।
दरअसल, पूरा मामला छतरपुर ज़िले के चंदला विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 4 का है। वहाँ रहने वाली प्रियंका सेन 9 महीने की गर्भवती थी। अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उसका पति भूरा सेन अपनी पत्नी को ठेले पर अस्पताल ले गया। भूरा सेन ने बताया कि उसने जननी एक्सप्रेस और एम्बुलेंस को कई बार फ़ोन किया, लेकिन कोई नहीं आया। उसकी पत्नी को बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था और उसे मजबूरन ठेले पर अस्पताल ले जाना पड़ा।
प्रियंका के पति ने बताया कि वह गर्भवती महिला को ठेले पर अस्पताल ले गया, लेकिन अस्पताल वालों ने उसे रात 8:00 बजे के बाद आने को कहा। हैरानी की बात यह है कि वहाँ मौजूद कर्मचारियों ने संवेदनहीनता से गर्भवती महिला और ठेले वाले की चीख-पुकार को अनसुना कर दिया और उसे वापस भेज दिया। यह नजारा देखकर लोग बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी खासे गुस्से में हैं।
चंदला विधानसभा क्षेत्र, राज्य मंत्री का
बता दें कि चंदला, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार का विधानसभा क्षेत्र है। दिलीप अहिरवार मुख्यमंत्री मोहन यादव के करीबी माने जाते हैं। एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छतरपुर में एक समारोह में करोड़ों रुपये की स्वास्थ्य परियोजना की घोषणा की थी। आज स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है।







