इंदौर के देवी अहिल्या बाई सभागार में निरभय सिंह पटेल की स्मृति में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता के दौरान एक अनोखा नजारा देखने को मिला। इस कार्यक्रम में मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव मौजूद थे। इसी बीच मेयर के बेटे संगमित्र भार्गव ने अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने खासकर बुलेट ट्रेन परियोजना और रेलवे से जुड़ी योजनाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जनता से किए वादे पूरे नहीं हुए।
बुलेट ट्रेन और रेल हादसों पर सवाल
संगमित्र भार्गव ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार ने बुलेट ट्रेन का सपना दिखाया, लेकिन यह अब तक सिर्फ पीपीटी तक ही सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में जमीन अधिग्रहण के दौरान घोटाले हुए हैं और जनता का पैसा पानी की तरह बहाया गया। इसके साथ ही उन्होंने रेल हादसों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “सरकार कहती है कि कवच प्रणाली से हादसे रुकेंगे, लेकिन पिछले 10 सालों में लगभग 20 हजार लोगों की जान रेल हादसों में गई है। जब ट्रेन पटरी से उतरती है तो सिर्फ डिब्बे नहीं टूटते, बल्कि किसी मां की गोद सूनी हो जाती है और किसी बच्चे का भविष्य अंधेरे में चला जाता है।”
रेलवे में भ्रष्टाचार और अधूरी योजनाओं का आरोप
संगमित्र ने आगे कहा कि सरकार ने दावा किया था कि देशभर में 400 रेलवे स्टेशन हवाई अड्डों जैसी सुविधाओं वाले बनाए जाएंगे, लेकिन हकीकत में सिर्फ 20 स्टेशन ही तैयार हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि “सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, लेकिन रेलवे में दलालों का साथ और जनता का विनाश दिखाई देता है।” उनकी इस बेबाक टिप्पणी ने पूरे सभागार को चौंका दिया।
मुख्यमंत्री का जवाब और विपक्ष की प्रतिक्रिया
संगमित्र के भाषण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच संभालते हुए माहौल हल्का करने की कोशिश की। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हमारे भतीजे ने अच्छा बोला। यही तो लोकतंत्र की ताकत है कि हर कोई अपनी बात रख सकता है। हालांकि, मैं उनके कुछ मुद्दों को जरूर सुधारूंगा।” दूसरी ओर, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संगमित्र की जमकर तारीफ की और इंस्टाग्राम पर लिखा कि “संगमित्र भार्गव एक प्रभावशाली वक्ता हैं।” उनके इस तंज को भाजपा सरकार पर हमला माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ कार्यक्रम को चर्चा का विषय बना दिया, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी।







