भाजपा विधायक पन्ना लाल शाक्य ने मंगलवार (9 सितंबर) को एक कार्यक्रम में देश की सुरक्षा और भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों की स्थिति जिस तरह बिगड़ी है, उसे देखकर भारत को पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने सभी युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देने की मांग की है। शाक्य ने अपने संबोधन में कहा कि खेल और खिलाड़ियों की उपलब्धियां जारी रहेंगी और देश का विकास अपने गति से आगे बढ़ेगा, लेकिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कलेक्टर से अपील की कि उनका लिखित प्रस्ताव तुरंत दिल्ली सरकार और रक्षा मंत्रालय तक भेजा जाए।
युवाओं के लिए अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण
भाजपा विधायक पन्ना लाल शाक्य ने कहा कि 18 से 30 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों को अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण मिलना चाहिए। उनका मानना है कि इस प्रकार का प्रशिक्षण युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगा। साथ ही, यह देश की सुरक्षा क्षमता को भी बढ़ाएगा। उन्होंने श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में अस्थिरता ने स्पष्ट कर दिया है कि समाज के हर वर्ग को आंतरिक और बाहरी खतरों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। शाक्य ने चेतावनी दी कि यदि भारत समय रहते कदम नहीं उठाता, तो हमारी स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
सेना की जिम्मेदारी सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं
विधायक ने युवाओं से अपील की कि वे देश की रक्षा को केवल सेना की जिम्मेदारी न समझें, बल्कि नागरिकों के रूप में सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहें। उन्होंने कहा कि यदि हर युवा सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करता है, तो भारत किसी भी परिस्थिति का सामना मजबूती से कर सकेगा। शाक्य के इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया और कहा कि यह कदम युवाओं को राष्ट्रीय हित में जागरूक करेगा।
बहस और संभावित चुनौतियां
वहीं, कुछ लोग मानते हैं कि इस प्रणाली को लागू करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अब यह देखना बाकी है कि सरकार और रक्षा मंत्रालय इस प्रस्ताव पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। हालांकि, यह निश्चित है कि पन्ना लाल शाक्य के बयान ने युवाओं और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस शुरू कर दी है। यह मुद्दा न केवल सुरक्षा के महत्व को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नागरिकों की भागीदारी से देश की सामूहिक शक्ति और तैयारियों में कितनी वृद्धि हो सकती है।







