मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में विश्व हिंदू परिषद की विधिक प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बैठक में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है और सम्राट विक्रमादित्य न्याय परंपरा के महान प्रणेता माने जाते हैं। उनके दिए गए निर्णय आज भी उदाहरण के रूप में याद किए जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय के क्षेत्र में विक्रमादित्य की पहचान विश्व स्तर पर अद्वितीय रही है। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में समय-समय पर आवश्यक कानून सुधार किए गए हैं, जो न्याय प्रणाली को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
न्याय परंपरा और भारतीय संस्कृति हमारी धरोहर
डॉ. यादव ने कहा कि न्याय की असली पहचान मन की पवित्रता और पंचों के निष्पक्ष निर्णय में निहित है। भारतीय संस्कृति और न्याय परंपरा हमारी धरोहर है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की कि न्यायालयों के निर्णयों का पालन सभी को समान रूप से करना चाहिए, क्योंकि यही लोकतंत्र और क़ानून व्यवस्था की मूल भावना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश में कानून सबके लिए समान है और जो भी इसके साथ खिलवाड़ करेगा, उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने के प्रयास और कड़े निर्णय
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए शोर नियंत्रण अधिनियम का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। साथ ही खुले में मांस बेचने पर प्रतिबंध लगाया गया है और इसका सख्ती से पालन कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लव जिहाद के मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत गरिमा के खिलाफ है। ऐसी गतिविधियों को राज्य में किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शी और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था का संकल्प
डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना है। समाज के हर वर्ग को समान न्याय मिले और यह विश्वास कायम हो कि मध्यप्रदेश में कानून सर्वोपरि है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ यह सुनिश्चित करेगी कि न्याय व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो और प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा व समान अधिकार प्राप्त हों। बैठक में न्याय प्रणाली की चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि भारतीय न्याय परंपरा से प्रेरणा लेकर आधुनिक भारत की न्याय व्यवस्था और अधिक शक्तिशाली बनेगी।







