मध्यप्रदेश में अवैध खनन की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतेन्द्र पटवारी खुद सड़क पर उतर आए और रेत से भरे ट्रकों की रॉयल्टी की जांच की। उन्होंने शहडोल ज़िले में ट्रक रोककर ड्राइवर से रॉयल्टी की रसीद दिखाई। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पटवारी अपने समर्थकों के साथ ट्रक के केबिन में चढ़कर ड्राइवर से कागज़ात मांगते हुए नज़र आ रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार अवैध खनन पर पूरी तरह नाकाम है और माफिया बेलगाम हो चुके हैं।
पुलिस से कराई रॉयल्टी की जांच
वीडियो में साफ दिख रहा है कि पटवारी ने ट्रक ड्राइवर से दस्तावेज मांगे। ड्राइवर ने अपने मोबाइल पर रॉयल्टी की रसीद दिखाई। इसके बाद पटवारी ने वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी को बुलाकर पूछा कि क्या रॉयल्टी ऑनलाइन देखी जा सकती है। जब पुलिसकर्मी ने हामी भरी तो ड्राइवर ने मोबाइल उसे सौंप दिया। जांच के दौरान यह पाया गया कि रॉयल्टी की रसीद तो थी, लेकिन उस पर समय और तारीख का ज़िक्र नहीं था। इस आधार पर पटवारी ने सवाल उठाया कि सरकार की नाक के नीचे खनन माफिया नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

खनन माफिया के हमलों का लंबा इतिहास
प्रदेश में अवैध खनन कोई नई समस्या नहीं है। बीते वर्षों में कई अधिकारी और पुलिसकर्मी खनन माफिया की हिंसा का शिकार हो चुके हैं। 2012 में आईपीएस नरेंद्र कुमार को मुरैना में ट्रैक्टर से कुचल दिया गया था। 2021 में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 15 दिनों में चार बार पुलिस और वन विभाग की टीमों पर हमले हुए। इसी साल मई में शहडोल में एएसआई महेन्द्र बागरी को ट्रैक्टर से कुचल कर मार डाला गया। अगस्त 2024 में राजगढ़ में डिप्टी तहसीलदार पर हमला हुआ, जबकि जून 2025 में श्योपुर में राजस्थान पुलिस पर माफिया ने पत्थरबाज़ी कर दी। हाल ही में 28 अगस्त 2025 को सिंगरौली में निजी कंपनी के कर्मचारियों पर हमला कर एक की जान ले ली गई। यह घटनाएँ बताती हैं कि खनन माफिया किस कदर बेखौफ हैं।
2000 करोड़ का धंधा और सियासी टकराव
मध्यप्रदेश में चंबल, नर्मदा, क्षिप्रा, बेतवा और सोन नदियां अवैध रेत खनन के सबसे बड़े गढ़ मानी जाती हैं। अनुमान है कि प्रदेश में हर साल 2000 करोड़ रुपए से अधिक का अवैध रेत कारोबार होता है। सरकार दावा करती है कि सैटेलाइट मॉनिटरिंग, ई-चेक गेट और खदानों की जियो-टैगिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, लेकिन असर नगण्य है। वहीं, बीजेपी ने पटवारी की कार्रवाई को गलत ठहराया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष को नियम-कायदों का ज्ञान है, उन्हें कानून अपने हाथ में लेने के बजाय लिखित शिकायत कलेक्टर, एसपी या खनिज अधिकारी को करनी चाहिए थी। कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा रही है कि माफियाओं पर कार्रवाई करने की बजाय विपक्षी नेताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।







