सोमवार रात करीब 9:45 बजे इंदौर के मध्य क्षेत्र रणिपुरा स्थित कोश्टी मोहल्ला, वार्ड नंबर 60 में बड़ा हादसा हो गया। जवाहर मार्ग पार्किंग के पास बनी एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर गिर गई। यह घटना सेंट्रल कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई लोग मलबे में दब गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।
छह लोग मलबे में फंसे, कई घायल अस्पताल में भर्ती
प्रारंभिक सूचना के मुताबिक इमारत गिरने के समय करीब छह लोग मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी। सौभाग्य से ज्यादातर लोग हादसे के समय अपने घरों से बाहर थे, जिसके कारण बड़ी जनहानि टल गई। फिर भी कुछ लोग मलबे में दब गए, जिन्हें प्रशासन, पुलिस, फायर ब्रिगेड, नगर निगम और एनडीआरएफ की संयुक्त टीमों द्वारा तुरंत निकाला जा रहा है। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर है।

लगातार बारिश और दरारें बनीं हादसे की वजह
डॉक्टरों और अधिकारियों ने बताया कि सभी घायलों का इलाज जारी है और वे खतरे से बाहर हैं। बताया जा रहा है कि लगातार हो रही बारिश के कारण इमारत में दरारें पड़ गई थीं, जो इस हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, पुलिस आयुक्त संतोष सिंह और कलेक्टर शिवम वर्मा मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी शुरू की। नगर निगम, जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम मिलकर मलबा हटाने और लोगों को बचाने का काम कर रही हैं।
जर्जर इमारतों की जांच शुरू, प्रशासन सतर्क
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इमारत पहले से ही जर्जर हालत में थी और पिछले कुछ दिनों से इसमें दरारें साफ दिखाई दे रही थीं। बावजूद इसके, इतने बड़े हादसे की आशंका किसी ने नहीं जताई थी। फिलहाल मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है और अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने आसपास की अन्य जर्जर और पुरानी इमारतों का निरीक्षण शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहरों में जर्जर इमारतों की समय पर जांच और मरम्मत क्यों नहीं होती।







