मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के बरेगी हिल्स क्षेत्र में बुधवार रात एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। दुर्गा पूजा पंडाल के पास खेल रहे दो मासूम बच्चे करंट की चपेट में आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। मृतकों की पहचान आयुष झारिया (8 वर्ष) और वेद श्रीवास (10 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों बच्चों को गंभीर विद्युत झुलसे का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई।
मंत्री राकेश सिंह ने जताया शोक, मुआवजा देने की घोषणा
घटना की जानकारी मिलते ही राज्य के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह हादसा अत्यंत गंभीर है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने मामले की तत्काल जांच के आदेश दिए और इसके लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। साथ ही उन्होंने मृतक बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

तीन सदस्यीय जांच समिति गठित, प्रारंभिक जांच में खुलासा
जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता गोरखपुर एसडीएम अनुराग सिंह करेंगे, जबकि पीडब्ल्यूडी के एसडीओ (इलेक्ट्रिकल एंड मेंटेनेंस) एस.के. शर्मा और पूर्वी क्षेत्र विद्युत कंपनी के सहायक अभियंता दिनेश पाल इसके सदस्य होंगे। समिति को तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पंडाल में अधिकृत कनेक्शन लिया गया था, लेकिन बाहरी सजावट के लिए अवैध कनेक्शन किया गया था। इसी लापरवाही के चलते बिजली के खंभे में करंट आया और मासूमों की जान चली गई।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, इलाके में पसरा मातम
हादसे के बाद पुलिस ने भी तेजी दिखाते हुए संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। शहर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) आशीष जैन ने बताया कि अब जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने पूरे बरेगी हिल्स क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया है। जहां नवरात्रि के अवसर पर भक्ति और उल्लास का माहौल होना चाहिए था, वहीं अब पंडाल वीरान और स्तब्ध खड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली की व्यवस्था में थोड़ी और सावधानी बरती जाती, तो यह दर्दनाक हादसा टल सकता था। यह घटना प्रशासन और आयोजकों दोनों के लिए बड़ी चेतावनी है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा से कभी समझौता नहीं होना चाहिए।







