मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 26 अक्टूबर को कहा कि राज्य में महिलाओं ने कई क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी है। महिलाओं की भागीदारी राज्य की 47 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप में है। हमारी बहनें अब केवल नौकरी की तलाश नहीं कर रही हैं, बल्कि रोजगार देने वाली भी बन रही हैं। इसी कारण से सरकार ने रोजगार-उन्मुख उद्योगों में महिलाओं को प्रतिमाह 5,000 रुपये देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल पैसा नहीं है, बल्कि हमारी बहनों का सम्मान है। यह योजना पहले 1,000 रुपये से शुरू हुई थी, अब इसे 1,500 रुपये प्रतिमाह तक बढ़ा दिया गया है। जो महिलाएँ रोजगार के लिए आती हैं, उन्हें भी सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव यह बात ‘मध्य प्रदेश एक्सीलेंस अवार्ड्स 2025’ समारोह के दौरान कही, जो भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कई महिलाओं और अन्य लोगों को पुरस्कार भी प्रदान किए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है और यह योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कांग्रेस शासनकाल में महिलाओं की अनदेखी
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य में 62 लाख बहनें पांच लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के साथ काम कर रही हैं। ‘लाखपति बहना योजना’ के तहत अब तक एक लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिल चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त किया जा रहा है। इसके विपरीत, कांग्रेस के शासनकाल में महिलाओं के लिए दरवाजे तक नहीं खोले गए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में हमारी सरकार के कार्यकाल में 33 प्रतिशत महिलाएं लोकसभा और विधानसभा में भी प्रवेश करेंगी। मुख्यमंत्री ने भोपाल वुमेन हब द्वारा इस आयोजन के आयोजन की सराहना की। इस समारोह में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने वाले लोग और पैरा-ओलंपिक में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी भी शामिल थे।

हमारी सांस्कृतिक विरासत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल रियासत की विशेषता यह है कि इसे बेगमों (रानियों) ने शासित किया। ब्रिटिश काल के दौरान रानी दुर्गावती ने मुगलों के खिलाफ 52 युद्ध लड़े। गोंड रानी कमलापति ने भी गौरवशाली इतिहास रचा। इसके अलावा, रानी लक्ष्मीबाई का नाम स्वतः याद आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति अद्भुत है। इसमें 33 करोड़ देवताओं का समावेश है, जो तीन प्रमुख देवी रूपों में प्रकट होते हैं।
उन्होंने बताया कि माँ सरस्वती ज्ञान की देवी हैं। उनकी कृपा प्राप्त करने पर माँ महालक्ष्मी की भी कृपा मिलती है। वहीं जगदम्बा, माँ भवानी-रण चंडी का भी विशेष महत्व है। देवी दुर्गा क्रोधित कभी नहीं होतीं, लेकिन जब होती हैं, तो संपूर्ण ब्रह्मांड उनके विरुद्ध नहीं होता। इन्हें प्रसन्न करने के लिए स्वयं भगवान महादेव को उन्हें प्रणाम करना पड़ता है।
बहनों से revived संस्कृति और सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशहरा केवल भगवान राम की विजय और रावण के पराजय के लिए नहीं मनाया जाता, बल्कि महिषासुर मर्दिनी की पूजा भी दशहरा के दिन की जाती है। यदि हम अपनी बहनों को सशक्त बनाते हैं, तो वे हमारी प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित करती हैं। माँ और बहनों का सम्मान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है।
उन्होंने यह भी बताया कि मातृप्रधान व्यवस्था को सर्वोच्च मानते हुए पृथ्वी को ग्रहों में विशेष स्थान दिया गया है। विश्व में 200 से अधिक देश हैं, लेकिन केवल भारत मातृप्रधान प्रणाली से जुड़ा है। यही कारण है कि हम गर्व से कहते हैं, “भारत माता की जय।” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर महिलाओं की उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान की सराहना की और कहा कि महिलाओं का सम्मान ही समाज की सच्ची प्रगति है।







