मध्य प्रदेश में एक बार फिर मतदाता सूची की जांच और मतदाता पहचान सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में निर्वाचन आयोग ने “SIR अभियान” (Special Intensive Revision) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें से मृत, डुप्लीकेट या गलत प्रविष्टियों को हटाना है। इस अभियान के तहत बूथ स्तर अधिकारी (BLOs) हर घर जाकर तीन बार मतदाताओं की पहचान की जांच करेंगे। यह प्रक्रिया 9 दिसंबर तक जारी रहेगी, जिसके बाद 1 जनवरी 2026 को नई मतदाता सूची जारी की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए ताकि आगामी चुनावों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
डुप्लीकेट और गलत प्रविष्टियों को हटाने पर विशेष ध्यान
अभियान के दौरान BLOs हर मतदाता से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनके विवरण की पुष्टि करेंगे। एसडीएम अर्चना शर्मा ने बताया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदाता सूची के आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे और घर-घर जाकर जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया में यदि कोई मतदाता दो या अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाया जाता है, तो उसका नाम केवल एक स्थान पर सही किया जाएगा। साथ ही, नए मतदाताओं के नाम भी सूची में जोड़े जाएंगे, विशेषकर 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि पहली बार वोट देने वाले युवाओं को मताधिकार से वंचित न होना पड़े। वहीं जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है या जो स्थानांतरित हो गए हैं, उनके नाम भी सूची से हटाए जाएंगे। यह अभियान सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
राज्य में कुल 5.74 करोड़ मतदाता, 65 हजार से अधिक ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब कुल 5.74 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से 29,340,832 पुरुष, 28,083,430 महिलाएं, और 65,014 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। राज्य में 18-19 वर्ष के 15.65 लाख युवा मतदाता, 80 वर्ष से अधिक आयु वाले 8.76 लाख वरिष्ठ मतदाता, और 100 वर्ष से अधिक आयु वाले 14,226 मतदाता भी शामिल हैं। ये आंकड़े न केवल राज्य की जनसंख्या की विविधता को दर्शाते हैं बल्कि लोकतंत्र में हर वर्ग की भागीदारी को भी रेखांकित करते हैं। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि मतदाता सूची में युवा मतदाताओं का अधिकाधिक समावेश करवाना उनकी प्राथमिकता है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नई पीढ़ी की भागीदारी और मजबूत हो सके।
7 फरवरी को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची, पारदर्शिता पर रहेगा जोर
निर्वाचन आयोग के अनुसार, सभी विवरणों की जांच और सुधार के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद जब मतदाता सूची को “फ्रीज” किया जाएगा, तो केवल विशेष परिस्थितियों में ही संशोधन की अनुमति दी जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ डेटा सुधार नहीं, बल्कि ईमानदार और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए मतदाताओं से भी अपील की गई है कि वे अपने नाम और विवरण की जांच कर लें तथा यदि कोई त्रुटि हो तो उसे समय पर सुधारने के लिए आवेदन करें। यह अभियान न केवल आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों का हिस्सा है, बल्कि यह लोकतंत्र के प्रति जनविश्वास और जिम्मेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है।







